
- रिपोर्ट: अनुराग सिंह बिष्ट
लखनऊ में इन दिनों बुलडोजर बाबा का बुल्डोजर बिना रुके दौड़ रहा है, और इस बार इसका शिकार बनी है राजधानी की अवैध इमारतें। जो लोग सोचते थे कि सिफारिशों से हर काम हो जाता है, उनके अरमानों पर पानी फिर गया है।
बाजारखाला थाने के सामने खड़ी एक शानदार कमर्शियल बिल्डिंग, जो मानकों को अंगूठा दिखा रही थी, आज एलडीए की नजरों में चढ़ गई। मालिक, एक अध्यापक साहब, अपनी प्रॉपर्टी को बचाने के लिए खूब दौड़-भाग किए, लेकिन इस बार सिफारिशों का जादू नहीं चला। एलडीए अपने फैसले पर अटल रहा, जैसे कोई जिद्दी बच्चा अपनी बात पर अड़ा रहता है।
इस कार्रवाई से यह साबित हो गया है कि लखनऊ में अब नियम-कानून ही सबसे बड़ी सिफारिश है। राजनीतिक पहुंच और बड़े-बड़े लोगों के नाम का अब कोई असर नहीं हो रहा है।
खबर यह भी है कि अध्यापक साहब की और भी कई इमारतें हैं जिन पर बुलडोजर का खतरा मंडरा रहा है। यह तो सिर्फ एक शुरुआत है, लगता है अब एलडीए ने अवैध निर्माण के पूरे नेटवर्क को साफ करने की ठान ली है।
यह कार्रवाई दिखाती है कि अब लखनऊ में सिर्फ उसी का सिक्का चलेगा जो कानून का पालन करेगा। यह उन लोगों के लिए एक सबक है जो सोचते हैं कि अवैध तरीके से पैसा कमाना और इमारतें बनाना आसान है। शायद उन्हें अब समझ आ गया होगा कि जब बुलडोजर चलता है तो कोई भी सिफारिश काम नहीं आती है।




