
- रिपोर्ट: अनुराग सिंह बिष्ट
सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक निर्णय सुनाते हुए कहा है कि अब किसी भी पत्रकार के खिलाफ सिर्फ इसलिए केस दर्ज नहीं किया जा सकता क्योंकि उसने सरकार की आलोचना की है।
अदालत ने साफ तौर पर कहा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1) के तहत ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता’ एक मौलिक अधिकार है, और इसे दबाया नहीं जा सकता।
यह फैसला न सिर्फ पत्रकारों के लिए राहत भरा है, बल्कि देश में मीडिया की स्वतंत्रता के लिए भी एक बड़ी जीत के तौर पर देखा जा रहा है।
अब सरकार की नीतियों या फैसलों पर सवाल उठाना या आलोचना करना आपराधिक कृत्य नहीं माना जाएगा, जब तक कि वह आलोचना हिंसक या भड़काऊ न हो।
मीडिया जगत ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे लोकतंत्र की रक्षा में एक मजबूत कदम बताया है।
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