
- रिपोर्ट- प्रतीक वार्ष्णेय
दयालपुर निवासी दंपती से की गई अवैध वसूली, अस्पताल ने थमाया नोटिस…
लेकिन कार्रवाई अभी भी सवालों के घेरे में
सरकारी अस्पताल में बच्चा नहीं, रिश्वत से भरा लिफाफा पैदा होता है” — पीड़ित की पोस्ट ने मचाया बवाल
सरकारी अस्पताल में मुफ्त इलाज और प्रसव की योजनाएं केवल पोस्टर और भाषणों तक सीमित रह गई हैं। हकीकत में जो होता है, वह दिल दहला देने वाला है। दयालपुर निवासी हरेंद्र सिंह की पत्नी मौनी देवी का जब मुरसान सीएचसी में 31 जुलाई को प्रसव हुआ, तो उन्हें राहत नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार का दर्दनाक तमाचा झेलना पड़ा।
हरेंद्र सिंह का आरोप है कि नर्स नीरज ने प्रसव के तुरंत बाद ₹2700 की अवैध वसूली की। ₹1500 अपने लिए, ₹500 सफाईकर्मी, ₹500 अन्य सहयोगी और ₹200 फार्म के नाम पर। जब हरेंद्र ने विरोध किया तो उनके साथ अभद्र भाषा में बात की गई।
पीड़ित का छलका दर्द, सोशल मीडिया पर जमकर वायरल
न्याय की उम्मीद में भटकते हरेंद्र ने अपने साथ हुए अन्याय को सोशल मीडिया पर साझा कर दिया, जिसमें उन्होंने अस्पताल का पूरा अनुभव और दर्द बयां किया।
पोस्ट के वायरल होते ही लोगों में आक्रोश की लहर दौड़ गई। सैकड़ों लोगों ने पोस्ट पर कमेंट कर स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए।
प्रभारी बोले – भेजा नोटिस, लेकिन कार्रवाई अभी अधर में
मुरसान CHC प्रभारी डॉ. चंद्रवीर सिंह ने कहा—
मैंने शिकायत उच्चाधिकारियों को भेज दी है। नर्स समेत संबंधितों को नोटिस देकर जवाब मांगा गया है। दोषी पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी।
लेकिन सबसे बड़ा सवाल…
क्या नोटिस देकर फाइलें बंद कर दी जाएंगी?
या स्वास्थ्य विभाग इन भ्रष्टाचारियों पर शिकंजा कसेगा?
क्या पीड़ित को उसका इंसाफ मिलेगा या सिर्फ आश्वासन?
बच्चा सरकारी योजना से पैदा हुआ, फिर मां से कैश क्यों वसूला?
जब प्रसव जैसी सेवाएं सरकार द्वारा मुफ्त घोषित हैं, तो फिर गरीब से खुलेआम वसूली क्यों?
मुरसान CHC में जो हुआ, वह अकेला मामला नहीं… सवाल ये है कि इस बार दोषी सलाखों तक पहुंचेंगे या फिर ‘नोटिस’ से मामला रफा-दफा कर दिया जाएगा?
जब अस्पताल में इलाज नहीं, सौदा हो रहा हो — तब आम आदमी कहां जाएगा?





