
- रिपोर्ट- प्रतीक वार्ष्णेय
हाथरस/सिकंदराराऊ। पशु विभाग में भ्रष्टाचार के एक बड़े मामले पर विभागीय कार्रवाई से पहले ही पर्दा डाल दिया गया। गुरुवार को पशु मित्र विवेक कुमार ने विभाग के ही एक स्वास्थ्य कर्मी पर 25% कमीशन मांगने का आरोप लगाया था। इस आरोप के साथ स्क्रीनशॉट के साक्ष्य और उच्चाधिकारियों को दी गई लिखित शिकायत ने विभाग में हलचल मचा दी थी।
लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि मात्र 24 घंटे बाद ही न सिर्फ शिकायतकर्ता अपने आरोपों से पलट गया, बल्कि विभाग ने भी जांच की बजाय ‘समझौता’ करा दिया। शुक्रवार दोपहर 3 बजे डिप्टी सीवीओ सिकंदराराऊ ने बयान जारी कर बताया कि पीड़ित और आरोपी के बीच समझौता हो गया है, अब कोई विवाद नहीं है।
सवालों के घेरे में विभागीय प्रक्रिया
इस पूरे घटनाक्रम ने पशु विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या भ्रष्टाचार की शिकायतों पर सिर्फ समझौता ही समाधान है?
जब लिखित शिकायत और साक्ष्य मौजूद थे, तो जांच क्यों नहीं कराई गई?
क्या विभाग किसी बड़ी लापरवाही या मिलीभगत पर पर्दा डाल रहा है?
क्या था मामला?
गुरुवार को विवेक कुमार ने आरोप लगाया था कि पशु स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी योजनाओं के मानदेय में से संबंधित कर्मचारी द्वारा 25 प्रतिशत की दलाली ली जाती है। इसके समर्थन में उसने वाट्सएप चैट और भुगतान संबंधित दस्तावेज भी सौंपे थे।
शिकायत की पुष्टि होते ही विभागीय अफसरों के बीच खलबली मच गई थी, लेकिन इसके ठीक अगले दिन पूरा मामला ‘आपसी समझौते’ की चादर में लपेट दिया गया।
जांच से पहले ‘समझौता’—किसके इशारे पर?
जानकारों का कहना है कि यह समझौता किसी दबाव या सियासी हस्तक्षेप का नतीजा हो सकता है। यदि जांच होती तो कई चौंकाने वाले नाम और घोटाले सामने आ सकते थे।
अब देखना यह है कि क्या विभागीय अधिकारी इस मामले की निष्पक्ष जांच कराएंगे या यह मामला भी दर्जनों अन्य शिकायतों की तरह फाइलों में दफन हो जाएगा।





