
रिपोर्ट: प्रतीक वार्ष्णेय
आदेश निकला, कार्रवाई नहीं!
हाथरस: बाबा साहब अंबेडकर की तस्वीर हटाने जैसा गंभीर मामला सामने आने के बाद हाथरस के शिक्षा विभाग की भूमिका एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी स्वाति भारती द्वारा दिनांक 07.08.2025 को एक पत्र जारी कर संबंधित शिक्षक से जवाब तलब करने की औपचारिकता तो निभाई गई, लेकिन अब यह सवाल हर तरफ से उठ रहा है कि आखिर खुद अधिकारी ही कब जांच के दायरे में आएंगी?
- क्या सवाल पूछना ही पर्याप्त है, या प्रशासन को जवाबदेही भी निभानी चाहिए?
- जब बाबा साहब का अपमान हुआ, तो अफसर सिर्फ मेल निकाल कर फुर्सत में क्यों बैठ गईं?
न्यूज़ चैनल ने किया था खुलासा, प्रशासन ने की खानापूर्ति!
“न्यूज़” चैनल पर यह मामला प्रमुखता से प्रसारित हुआ, जिसमें संविलियन विद्यालय, रतीमनपुर में बाबा साहब अंबेडकर की तस्वीर हटाए जाने को लेकर प्रिंसिपल पर छात्रों और अभिभावकों में जबरदस्त आक्रोश देखने को मिला। परंतु शिक्षा विभाग की शीर्ष अधिकारी ने कोई सख्त कदम उठाने के बजाय केवल जवाब मांगकर अपनी ज़िम्मेदारी पूरी समझ ली।

क्या जांच सिर्फ नीचे वालों के लिए होती है?
अब जनता पूछ रही है —
- क्या बेसिक शिक्षा अधिकारी खुद इन घटनाओं से अंजान थीं?
- क्या उनके कार्यालय में बैठे अफसर मामले की जानकारी के बाद भी चुप रहे?
- क्या यही “निपुण भारत” का चेहरा है, जिसमें अफसर आदेश देकर अपनी भूमिका खत्म मान लेते हैं?
पुराने मामलों पर भी दिखी थी चुप्पी!
यह पहला मौका नहीं है जब हाथरस की बेसिक शिक्षा अधिकारी सवालों के घेरे में हैं। पहले भी शिक्षा में भ्रष्टाचार, फर्जी नियुक्तियां, अनियमितताएं और जांच के नाम पर कई फाइलें रद्दी की टोकरी में डाल दी गईं। कार्यालय में बैठे बाबू केवल खानापूर्ति के लिए जांच फाइलें भरते हैं, कार्रवाई किसी पर नहीं होती।
तो क्या यह माना जाए कि जांच का मतलब सिर्फ समय निकालना है? या फिर प्रशासनिक कुर्सी पर बैठना अब “उत्तरदायित्व से छूट” का प्रमाणपत्र बन चुका है?
एक वकील पर मुकदमा तो दर्ज हो गया, लेकिन खुद पर चुप्पी क्यों?
हाल ही में एक एडवोकेट पर तो तेजी से मुकदमा दर्ज कर दिया गया, लेकिन जब सवाल शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर उठा, तो कार्रवाई के नाम पर सिर्फ एक मेल निकाला गया।
- क्या यही दोहरा मापदंड है प्रशासन का?
- क्या बड़े पद पर बैठकर खुद को जवाबदेही से मुक्त समझा जाता है?
जनता का सीधा सवाल-अगर बाबा साहब की तस्वीर हटाना मामूली बात है, तो फिर देश का संविधान भी क्या अब केवल किताबों तक सीमित रहेगा?”
- बेसिक शिक्षा अधिकारी स्वाति भारती के खिलाफ स्वतंत्र जांच बैठाई जाए।
- पुराने लंबित मामलों की समीक्षा हो।
- शिक्षा विभाग में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।
अब सवाल सिर्फ तस्वीर हटाने का नहीं, प्रशासन की सोच और सिस्टम की सड़ांध का है।
बाबा साहब का अपमान हो और अफसर केवल कुर्सी पर बैठकर आदेश जारी करें — ये मंज़ूर नहीं!





