
- रिपोर्ट: पंकज झा
वाराणसी। उपभोक्ता परिषद ने पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम की बिजली दर की जनसुनवाई में बिजली दरों में कमी करने स्मार्ट प्रीपेड मीटर की जांच कराने संविदा कर्मी की छटनी पर रोक लगाने व निजीकरण व्यवस्था हमेशा के लिए समाप्त करने सहित पूर्वांचल में उपभोक्ता शिकायतों के बढ़ने पर व्यक्ति की चिंता। उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक कार्य के तत्व धान में आज मंडल आयुक्त सभागार बनारस में पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम की बिजली दर की सुनवाई नियामक आयोग अध्यक्ष श्री अरविंद कुमार व सदस्य श्री संजय कुमार सिंह की उपस्थिति में संपन्न हुई जिसमें सर्वप्रथम श्री शंभू कुमार प्रबंध निदेशक पूर्वांचल विद्युत वितरण कंपनी द्वारा प्रस्तुतीकरण किया गया उसके बाद उपभोक्ता परिषद ने मोर्चा संभाला।
प्रदेश के उपभोक्ताओं की तरफ से अपनी बात रखते हुए उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व देश की सर्वोच्च संवैधानिक समिति सेंट्रल एडवाइजरी कमेटी के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा उत्तर प्रदेश में सभी बिजली कंपनियों पर प्रदेश के 3 करोड़ 88 लाख विद्युत उपभोक्ताओं का लगभग 51000 करोड़ से ज्यादा का सरप्लस निकल रहा है ऐसे में देश का कोई भी कानून उत्तर प्रदेश में बिजली दरों में बढ़ोतरी की इजाजत नहीं देता या तो एक साथ 45% बिजली घरों में कमी की जाए या तो अगले 5 वर्षों तक 8% बिजली दरों में कमी करके उपभोक्ताओं का हिसाब बराबर किया जाए उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने निजीकरण पर तंज करते हुए कहा उपभोक्ता परिषद की लड़ाई का नतीजा है कि आयोग ने निजीकरण पर दर्जनों संवैधानिक पेज फंसा दिए नहीं तो आज इस सभागार में अडानी टाटा या कोई अन्य की तरफ से बिजली दर का प्रस्तुतीकरण किया जा रहा होता लेकिन मैं बता देना चाहता हूं कि आगे भी जिस प्रकार से अभी निजीकरण पर जोधपुर में फैसला लिया गया है उत्तर प्रदेश में निजीकरण नहीं होने देंगे क्योंकि निजीकरण से उपभोक्ताओं का नुकसान होगा।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा स्मार्ट प्रीपेड मीटर का खर्च उपभोक्ताओं पर नहीं डाला जा सकता यह केंद्र का कानून है स्मार्ट प्रीपेड मीटर तेज चल रहा है या धीमा चल रहा है इस पर बहस पूरे उत्तर प्रदेश में हो रही है लेकिन एक बात सत्य है जब नियामक आयोग ने इस पर पूरी रिपोर्ट बिजली कंपनियों से मंगाई तो उसमें पूर्वांचल बिजली कंपनी ने स्वता स्वीकार किया कि जिन उपभोक्ताओं के घरों में पहले स्मार्ट प्रीपेड मीटर नहीं लगा था उनकी औसत रीडिंग 604 यूनिट थी अब 705 हो गई यानी कि लगभग 16% वृद्धि हुई है इसका मतलब कहीं ना कहीं कुछ गड़बड़ जरूर है इसकी जांच होनी चाहिए।
बड़े पैमाने पर विगत वर्ष बिजली चोरी में उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन ने छूट दिया उसका खामियाजा उपभोक्ताओं पर नहीं डाला जाना चाहिए विजिलेंस मिकी लगातार शिकायत आ रही है जबकि उन्हें बॉडी वार्म कैमरा उपलब्ध करा दिया गया है जिस पर जीपीआरएस सहित पूरी ऑडियो वीडियो रिकॉर्ड होगी इसके बावजूद भी बिजलेंस के लोग बॉडी वॉर्म कैमरा का उपयोग क्यों नहीं कर रहे हैं पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम में केपीटलाइजेशन पर लगभग 2820 करोड़ और वही आरडीएसएस योजना में भी हजारों करोड़ खर्च किया जा रहा है इसके बाद भी वितरण हानियां काम नहीं हो रही है ऐसा क्यों।
राष्ट्रीय औसत वितरण ट्रांसफार्मर जलने का 2% है लेकिन आज भी पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम में वितरण ट्रांसफार्मर वर्ष 2024 -25 में जो जले हैं उनका प्रतिशत 11.49% है पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम में उपभोक्ता शिकायतों का हाल लिया है कि वर्ष 2022-23 में ज उपभोक्ता शिकायत साल भर में प्राप्त हुई थी वह 474000 थी और अब वर्ष 2024 -25 में सत्यापित आंकड़ों की बात करें तो वह शिकायतें 997999 यानी कि लगभग 10 लाख पहुंच गई इसका मतलब उपभोक्ता शिकायतें बढ़ रही है इसी प्रकार से पूरे उत्तर प्रदेश में लगभग 2324 के आंकड़ों पर ध्यान दें तो 1120 लोगों की जान साल भर में गई वहीं 2012-13 में केवल 570 लोग की जान गई थी इसका मतलब विद्युत दुर्घटनाएं लगातार बढ़ रही है।
पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम में लॉन्ग अनपेड विद्युत उपभोक्ताओं की संख्या लगभग 1436000 है वही आज तक कभी भी बिल न जमा करने वाले विद्युत उपभोक्ताओं की संख्या 19 लाख के ऊपर है और अगर बात कर ले बनारस के दोनों जनों में तो केवल बनारस के दोनों जून में मिलकर 6 लाख से ज्यादा विद्युत उपभोक्ता लॉन्ग अनपढ़ है या तो नेवर पेड़ है जो चिंता का विषय है माननीय मुख्यमंत्री जी के क्षेत्र गोरखपुर में एक विद्युत उपभोक्ता के पॉइंट कनेक्शन का उदाहरण देते हुए कहा यहां पीढ़ी कागजों में कर दी जाती है लेकिन उपभोक्ताओं का बिल चलता रहता है यह पूर्वांचल की व्यवस्था है।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष संविदा कार्मिकों की चटनी पर करारा हमला बोलते हुए कहा कि फेशियल अटेंडेंस होने की वजह से यदि 40 किलोमीटर लंबे फीडर पर 4:00 बजे ब्रेकडाउन की सूचना आती है तो जब तक संविदा कार्मिक 5:15 बजे तक अपना फेशियल अटेंडेंस नहीं लगा लेता हुआ 40 किलोमीटर दूर ब्रेकडाउन अटेंड करने नहीं जाता क्योंकि यदि वह अटेंडेंस नहीं लगाएगा तो उसे सैलरी नहीं मिलेगी और ब्रेकडाउन अटेंड करने जाएगा तो उतनी जल्दी वह सब स्टेशन पर पहुंच नहीं सकता क्योंकि फेशियल अटेंडेंस केवल 100 मीटर की दूरी पर ही काम कर रहा है।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार ने जो सेवा संविदा बोर्ड बनाया है उसके अधीन सभी संविदा कार्मिकों को रखा जाए और उन्हें समान काम समान वेतन दिया जाए सम वहीं उन्होंने बिजली कंपनियों पर करारा हमला बोलते हुए कहा कि सभी पदों पर नियमित भर्ती विद्युत सेवा आयोग के माध्यम से कराई जाए क्योंकि लंबे समय से बिजली कंपनियों मे रिक्त पद नहीं भरे गए जिसकी वजह से समस्याएं आ रही है और मैनपावर की कमी दिख रही है।देख लिया उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने बुनकरों की समस्या उठाते हुए कहा कि बुनकरों को दोयम दर्जे की तरह समझा जा रहा है या गलत है उनकी समस्याओं पर बात होनी चाहिए और उनकी समस्याओं का समाधान होनी चाहिए लंबे समय से उनको फ्लैट दर पर बिजली दिया जाने की मांग को विचार किया जाना चाहिए।
सुनवाई में इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन बुनकर सभा स्मॉल मीडियम संगठन सभी ने पूर्वांचल की कमियों पर प्रकाश डालते हुए लगातार बढ़ते ब्रेकडाउन सहित रामनगर इंडस्ट्री एसोसिएशन ने प्रबंध निदेशक द्वारा टेलीफोन न उठाए जाने का भी मुद्दा उठाया और कहां कार्यालय में पहुंचने के बाद भी किसी से नहीं मिलते।




