
- रिपोर्ट: पंकज झा
वाराणसी। चैत्र नवरात्रि के पंचमी से सप्तमी तक चलने वाले श्री श्री 1008 बाबा महाश्मसान नाथ जी का त्रिदिवसीय श्रृंगार महोत्सव आज समापन दिवस के साथ भव्य रूप से संपन्न हुआ। अंतिम दिन योगिनियों ने नित्यांजली अर्पित कर शिव को अपने श्रद्धा सुमन समर्पित किए, जिससे शव लोक शिवलोक में परिवर्तित हो गया।
तीसरे दिन बाबा महाश्मशान नाथ जी एवं माता मशान काली जी का सांयकाल पंचमकार का भोग लगाया गया और तांत्रिक विधि से भव्य आरती संपन्न हुई। मंदिर प्रांगण रजनीगंधा, गुलाब और अन्य सुगंधित फूलों से सजाया गया। आरती के पश्चात नगर वधुओं ने गायन और नृत्य के माध्यम से बाबा को भावांजली अर्पित की और मन्नत मांगी कि बाबा उनके अगले जन्म को सुधारें। यह दृश्य भक्तों के लिए अत्यंत भावपूर्ण था, जिससे कई की आंखें नम हो गईं।
ऐतिहासिक परंपरा
व्यवस्थापक गुलशन कपूर ने बताया कि यह परंपरा सैकड़ों वर्षों से चली आ रही है। कहा जाता है कि राजा मानसिंह द्वारा मंदिर के जीर्णोद्धार के समय संगीत के लिए कोई कलाकार उपस्थित नहीं हुआ। तब नगर वधुओं ने अपनी भावांजली राजा तक पहुँचाई और बाबा के चरणों में गीतांजलि अर्पित की। राजा प्रसन्न हुए और तब से यह परंपरा निरंतर जारी है। नगर वधुएं चैत्र नवरात्रि के सप्तमी को बिना बुलाए भी काशी के मणिकर्णिका घाट स्वयं उपस्थित होती हैं।
रात्रि जागरण और भजन संध्या
बाबा का रात्रि जागरण जलती चिताओं के पास मंदिर में प्रारंभ हुआ। अतिथियों का स्वागत व्यवस्थापक गुलशन कपूर और उपाध्यक्ष संजय प्रसाद गुप्ता ने किया।
भजन और कीर्तन में शामिल थे:
“दुर्गा दुर्गति नाशिनी, दिमिग दिमिग डमरू कर बाजे, डिम डिम तन दिन दिन, तू ही तू जगबक आधार तू, ओम नमः शिवाय”
दादरा, ठुमरी और चैती गीतों के माध्यम से भक्तों ने बाबा के चरणों में गीतांजलि अर्पित की।
काशी के प्रसिद्ध भजन “औम मंगलम औमकार मंगलम” और “बम लहरी बम बम लहरी” ने भक्तों को झूमने पर मजबूर कर दिया।
उपस्थित पदाधिकारी और भक्तजन
अध्यक्ष चैनू प्रसाद गुप्ता, व्यवस्थापक गुलशन कपूर, महामंत्री बिहारी लाल गुप्ता, महंत संजय झींगरन, विजय शंकर पांडे, दिलीप यादव, संजय गुप्ता, दीपक तिवारी, अजय गुप्ता, रिंकू पांडेय, मनोज शर्मा, विजय गुप्ता विज्जु सहित अन्य पदाधिकारी और भक्तजन उपस्थित रहे।
इस भव्य आयोजन ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक आनंद और भावपूर्ण अनुभव प्रदान किया।





