- रिपोर्ट: प्रतीक वार्ष्णेय
हाथरस: तहसील सिकंद्राराऊ के नगर पालिका परिषद कार्यालय में शासन-प्रशासन की गरिमा उस वक्त तार-तार हो गई जब सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें GT रोड पर पंचर की दुकान चलाने वाला मोहम्मद आसिफ EO की कुर्सी पर बैठा ‘फरियादी’ की शिकायत सुनते हुए दिखाई दिया।
वीडियो में वह पूरी तरह से अफसर की एक्टिंग करता दिख रहा है, जबकि बाकी युवक एक फरियादी और कैमरामैन की भूमिका में हैं।
AIMIM से जुड़ाव और कुर्सी पर बैठकर एक्टिंग – यह सिर्फ मज़ाक नहीं!
सूत्रों की मानें तो मोहम्मद आसिफ AIMIM का पूर्व विधानसभा क्षेत्र अध्यक्ष रह चुका है, और चौंकाने वाली बात यह है कि सिकंद्राराऊ नगर पालिका की मौजूदा अध्यक्ष भी इसी संगठन से ताल्लुक रखती हैं। अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या संगठनात्मक संबंधों के चलते ही आसिफ को इस हद तक छूट मिली?
जब नगर पालिका अध्यक्ष से पूछा गया तो जवाबों में फंस गईं बातें!
जब सिकंद्राराऊ नगर पालिका अध्यक्ष से बात की, तो उन्होंने पहले तो कहा कि “यह पुराना वीडियो है,” फिर बात बदलते हुए कहा कि “वह EO का कमरा ही नहीं है,” और फिर कहा “यह अध्यक्ष का कमरा नहीं था।”
उनके जवाब लगातार बदलते रहे — न कोई स्पष्ट बयान, न जिम्मेदारी।
अब सवाल ये उठता है कि क्या उन्होंने यह गोलमोल जवाब इसलिए दिया, क्योंकि वीडियो में बैठा युवक उन्हीं के संगठन से जुड़ा हुआ था?
EO की गैरमौजूदगी में खुलेआम घुसपैठ, गोपनीय फाइलों पर मंडराया खतरा
नगर पालिका परिषद का यह दफ्तर कोई मामूली जगह नहीं है। यहां महत्वपूर्ण दस्तावेज, प्रस्ताव और योजनाओं से जुड़ी गोपनीय फाइलें रखी जाती हैं। ऐसे में यह गंभीर चूक मानी जा रही है कि कोई भी व्यक्ति यहां घुसकर कुर्सी पर बैठकर अभिनय करे और प्रशासन चुप बैठा रहे।

SDM से की गई शिकायत, EO बोले – जांच कर होगी कार्रवाई
पालिका के कुछ सभासदों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उपजिलाधिकारी (SDM) से इसकी शिकायत दर्ज कराई है। EO का कहना है कि वह मामले की जांच कर रहे हैं और दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।

- क्या सरकारी कुर्सियां ‘रील’ बनाने के लिए हैं?
- क्या संगठन का असर इतनी छूट दे सकता है कि कोई सरकारी कुर्सी को मज़ाक बना दे?
- क्या नगरपालिका अध्यक्ष का मौन रहना संयोग है या संगठनात्मक संलग्नता का परिणाम?
- क्या EO का कार्यालय अब सोशल मीडिया स्टूडियो बन गया है?

अगर यही हाल रहा तो…
“कल कोई चायवाला अफसर, पकोड़ेवाला मंत्री और यूट्यूबर कलेक्टर बनकर वीडियो बनाएगा, और हम कहते रहेंगे – यह पुराना वीडियो है!”
अब निगाहें SDM और जिला प्रशासन पर टिकी हैं – क्या होगी कड़ी कार्रवाई या फिर संगठन का असर पड़ जाएगा भारी?





