
- रिपोर्ट: अनुराग सिंह बिष्ट
लखनऊ। नगर निगम लखनऊ में पुनरीक्षित बजट 2025-26 को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। महापौर सुषमा खर्कवाल ने बजट दस्तावेज़ को बिना चर्चा सीधे डाक से भेजे जाने को गंभीर लापरवाही बताते हुए कहा कि “पुनरीक्षित बजट कोई सामान्य कागज़ी कार्य नहीं, बल्कि शहर के विकास की दिशा तय करने वाला दस्तावेज़ है। इसे डाक से भेजना गैर-जिम्मेदाराना रवैया है।”
महापौर की नाराज़गी के बाद नगर निगम प्रशासन ने समिति विभाग के द्वितीय श्रेणी लिपिक सुखदेव का वेतन बाधित कर दिया है। अपर नगर आयुक्त नम्रता सिंह द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि संबंधित लिपिक ने पुनरीक्षित बजट 2025-26
से संबंधित पत्रावली लेने से मना कर दिया, जो गंभीर अनुशासनहीनता है।
लिपिक से तीन दिन के भीतर लिखित स्पष्टीकरण मांगा गया है, अन्यथा विभागीय कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
इस बीच, नगर निगम के कर्मचारी संगठनो ने इस कार्रवाई पर घोर आपत्ति जताते हुए कहा है कि संगठन नगर आयुक्त और अपर नगर आयुक्त को ज्ञापन सौंपेगा।
मुख्यालय में इस पूरे मामले को लेकर प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। लखनऊ नगर निगम में विकास के बजाय आपसी विवाद काफी बढ़ गया!



