
- रिपोर्ट: अजय सोनकर
वाराणसी: धार्मिक नगरी काशी में इस वर्ष दिव्या दीपावली का पर्व भव्यता और श्रद्धा के साथ मनाया गया। गंगा के घाटों से लेकर काशी विश्वनाथ मंदिर तक, हर ओर दीपों की जगमगाहट और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। पूरा शहर सुनहरी रोशनी से नहा उठा और काशी की दिवाली देशभर के लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गई।
गंगा के किनारे स्थित दशाश्वमेध, अस्सी और राजघाट जैसे प्रसिद्ध घाटों पर लाखों दीप जलाए गए। श्रद्धालुओं ने दीपदान कर माता गंगा से सुख, समृद्धि और शांति की कामना की। गंगा आरती के दौरान पूरा वातावरण “हर हर महादेव” और “जय गंगे” के जयघोष से गूंज उठा।
काशी विश्वनाथ मंदिर को विशेष फूलों और रोशनी से सजाया गया था। मंदिर परिसर में विशेष पूजा-अर्चना और रुद्राभिषेक का आयोजन किया गया, जिसमें देशभर से आए श्रद्धालुओं ने भाग लिया। भक्तों की लंबी कतारें सुबह से ही दर्शन के लिए लगी रहीं।
दीपावली के अवसर पर बनारस के बाजारों में भी जबरदस्त रौनक देखने को मिली। मिठाइयों, दीयों, पटाखों और सजावटी सामान की दुकानों पर भारी भीड़ रही। बनारसी पेड़ा और लड्डू की मिठास ने त्योहार के माहौल को और भी खास बना दिया।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों के तहत घाटों पर पारंपरिक संगीत और नृत्य प्रस्तुतियों का आयोजन किया गया। पर्यटक और स्थानीय लोग देर रात तक घाटों की जगमगाहट का आनंद लेते रहे। गंगा के जल पर तैरते दीपों का दृश्य काशी की इस दिव्या दीपावली को अविस्मरणीय बना गया।
दिव्या दीपावली के इस पर्व ने एक बार फिर काशी की आध्यात्मिकता और सांस्कृतिक विरासत को दुनिया के सामने उजागर किया — जहाँ आस्था, परंपरा और सौंदर्य एक साथ मिलकर ‘प्रकाश पर्व’ की अद्भुत झांकी पेश करते हैं।



