
- रिपोर्ट: शुभम
बाराबंकी: राजधानी लखनऊ से सटे जिला बाराबंकी में गांव फतेहसराय में भ्रष्टाचार इस कदर हो रहा था लेकिन उसके बाद भी अधिकारी मामले को और अपने कर्मचारियों को बचाने में लगे थे। आपको बता दूं कि पंचायती जिला राज्य अधिकारी नितेश भोंडेले से शिकायतकर्ता दिलीप कुमार ने कई बार मिलने का प्रयास किया वह अधिकारी दिलीप से मिलने के लिए मना कर देते थे। उनके ऑफिस का बाबू कहता था साहब छुट्टी पर है कभी साहब इस कार्यक्रम में तो कभी उसे कार्यक्रम में तो कभी मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में यही आए दिन चला रहा था और आखिर में वह घड़ी आ ही गई जब आदेश जारी करना पड़ा। इस अधिकारी को आगरा में रहते भी सस्पेंड किया गया था।
लेकिन जब मामला उच्च न्यायालय लखनऊ में पहुंचा तब अधिकारी हरकत में आए पूरा मामला हम आपको बताते चलें कि बाराबंकी गांव फतेहसराय, विकासखंड बंकी के ग्राम प्रधान सचिन वर्मा पर वित्तीय अनियमितता, फर्जी दस्तावेज़ तैयार करने और सरकारी धन के दुरुपयोग के आरोप अब सत्यापित हो चुके हैं। पीड़ित दिलीप कुमार द्वारा न्यायालय की शरण लेने के बाद प्रशासनिक मशीनरी हरकत में आई और विभिन्न विभागों की संयुक्त जांच में ग्राम प्रधान की भूमिका संदिग्ध नहीं, बल्कि दोषपूर्ण पाई गई है।
अधिकारियों ने यूपी पंचायत राज अधिनियम-1947, मनरेगा एसओपी, वित्त आयोग दिशा-निर्देश तथा जांच नियमावली 1997 व 2001 के तहत किए गए परीक्षण में कई गंभीर गड़बड़ियां उजागर की हैं, जो सीधे-सीधे गबन, कूटरचित और पद के दुरुपयोग की श्रेणी में आती हैं।
जांच में सामने आए कठोर तथ्य – प्रधान प्रथम दृष्टया दोषी।
अधिकारियों के ऑफ़िस में न मिलने और लाख बहाने के बावजूद भी शिकायतकर्ता दिलीप कुमार ने नहीं मानी हार।
गांव फतेहसराय निवासी दिलीप कुमार ने बाराबंकी अधिकारियों के सैकड़ों चक्कर लगाते लगाते उन्होंने हार नहीं मानी। और आखिर में जिलाधिकारी ने भ्रष्टाचार के मामले में एक पत्र लिखा और उस पत्र में टीम गठित की। टीम बनने के बाद भी उच्च अधिकारी कभी मौके पर नहीं गए जो नीचे के एक-दो कर्मचारी थे उन्होंने ही खाना पूर्ति करने का प्रयास किया। लेकिन काफी प्रयास करने के बाद तब जाकर कुछ सीनियर अधिकारी मौके पर पहुंचे और जॉच की। कई महीनों की जांच में धीमे-धीमे या साबित होता चला जा रहा था लेकिन कार्रवाई न की जाए इसके लिए लगातार शिथिल रवैया अपनाया जा रहा था लेकिन दिलीप कुमार के प्रयास से आखिर भ्रष्टाचारी फतेहसराय ग्राम प्रधान सचिन वर्मा पर कई दोष व फर्जी हस्ताक्षर प्रधान के द्वारा किए गए यह सिद्ध हो ही गया।
जिलाधिकारी ने जांच के लिए इन अधिकारियों को दिया था आदेश।
जांच टीम—भूमि संरक्षण अधिकारी (कुर्सी), सहायक अभियंता (जल निगम), तहसीलदार (नवाबगंज) और जिला लेखा परीक्षा अधिकारी ने ग्राम प्रधान द्वारा प्रस्तुत अभिलेखों को अपूर्ण, कूटरचित और भ्रामक पाया। विशेष रूप से।
1. निर्माण कार्य में तिथि बदलकर गुमराह करने का प्रयास
मेन रोड से संबंधित खड़ंजा निर्माण में ओवरराइटिंग कर तिथि बदल दी गई, जिससे अधिकारियों को भ्रमित करने की कोशिश स्पष्ट दिखाई देती है। यह भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467 व 468 (धोखाधड़ी व कूटरचना) की परिधि में आने वाला गंभीर अपराध है।
2. योजना विवरण छिपाकर सरकारी धन का अनियमित आहरण
कोटेशन और तुलनात्मक सारणी में योजना का नाम न लिखकर शासकीय धनराशि गबन की गई। यह कार्य धारा 409 (लोकसेवक द्वारा धन का दुरुपयोग) के अंतर्गत दंडनीय है।
3. मस्टर रोल में भारी अनियमितता।
कार्य दिवस, भुगतान विवरण और Paid/Cancelled की मोहर नहीं।
श्रमिकों की उपस्थिति और कार्य का स्पष्ट उल्लेख नदारद।
मस्टर रोल की तिथि संदिग्ध और माप पुस्तिका कूटरचित।
ये सभी तथ्य स्पष्ट करते हैं कि मनरेगा निधि में भारी वित्तीय हेराफेरी की गई।
4. अमृत सरोवर कार्य में भी गड़बड़ी की गई।
विरांगना झलकारी बाई अमृत सरोवर योजना (वित्तीय स्वीकृति 2022) के लिए 2024-25 का मांगपत्र संलग्न कर गलत भुगतान किया गया। जांच में पाया गया। की मांगपत्र पर सक्षम अधिकारी के हस्ताक्षर ही नहीं है। श्रमिकों के कार्य दिवसों का कोई रिकॉर्ड नहीं पाया गया। वेजलिस्ट पर प्रधान, सचिव और लेखाकार के हस्ताक्षर तक नहीं किए गए फिर भी भुगतान कर दिया गया।
यह कार्य लोकवित्त अनुशासन का खुला उल्लंघन है।
कानूनी कार्रवाई की ओर बढ़ता प्रशासन।
जांच रिपोर्ट में स्पष्ट उल्लेख है कि ग्राम प्रधान के प्रस्तुत अभिलेख कूटरचित, भ्रामक और शासनादेशों के विपरीत पाए गए।
यूपी पंचायत राज अधिनियम-1947 की धारा 95(1)(छ) के अंतर्गत प्रधान के वित्तीय व प्रशासनिक अधिकार तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिए गए।
अनियमितता सिद्ध होने पर पद से हटाने, आपराधिक मुकदमा दर्ज करने और सरकारी धन की रिकवरी की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।
नई उच्चस्तरीय जांच टीम गठित।
जांच नियमावली 1997 व संशोधित नियमों के अनुसार नई जिला स्तरीय जांच टीम गठित की गई है।
जिला प्रशिक्षण अधिकारी, बाराबंकी।
सहायक अभियंता, ग्रामीण अभियंत्रण विभाग।
इन अधिकारियों को 15 दिनों के भीतर कठोर एवं सुस्पष्ट रिपोर्ट देने के निर्देश जारी किए गए हैं, ताकि आगे की कार्रवाई। दंड, पद से निष्कासन, रिकवरी और एफआईआर कानूनी रूप से सुनिश्चित की जा सके।
गाँव में भ्रष्टाचार पर चर्चा तेज, अगली कार्रवाई पर सबकी निगाहें।
ग्राम फतेहसराय में सचिन वर्मा पर इस कठोर प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर जोरदार चर्चा है। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से विकास कार्यों में अनियमितताएं होती रही हैं। अब दोष सिद्ध होने के बाद लोग प्रधान के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की उम्मीद कर रहे हैं। अब देखना यह भी होगा कि इसमें संलिप्त नीचे के अधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट में प्रधान के द्वारा कराया गया सारा कार्य मानक के अनुसार है लेकिन जिलाधिकारी के द्वारा जांच टीम ने कोई काम सही नहीं पाया। फर्जी हस्ताक्षर किए गए । अब देखना यह होगा कि इस भ्रष्टाचार के खेल में शामिल नीचे के अधिकारियों पर अधिकारी क्या कार्रवाई करते हैं या उनको अभय दान देते हैं।


