
- तारुन व मयाबजार में 10 फरवरी से घर-घर दवा सेवन अभियान
- रिपोर्ट: अमित कुमार
अयोध्या : राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत जनपद अयोध्या के तारुन एवं मयाबजार विकासखंडों में 10 से 28 फरवरी 2026 तक सामूहिक दवा सेवन अभियान संचालित किया जाएगा। इस अभियान के तहत दोनों विकासखंडों की लगभग 4.93 लाख लक्षित आबादी को फाइलेरिया से बचाव की दवा खिलाई जाएगी।
अभियान के सफल संचालन हेतु 87 सुपरवाइजर एवं 495 टीमें गठित की गई हैं, जो घर-घर जाकर पात्र व्यक्तियों को अपने सामने दवा सेवन कराएंगी। सभी ग्राम पंचायतों में अभियान का शुभारंभ जनप्रतिनिधियों द्वारा स्वयं दवा सेवन कर लोगों को प्रेरित करते हुए किया जाएगा।
यह जानकारी मंगलवार को सीएमओ सभागार में आयोजित मीडिया संवेदीकरण कार्यशाला में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. देवेन्द्र कुमार भिटौरिया ने दी। उन्होंने कहा कि फाइलेरिया उन्मूलन की सबसे बड़ी चुनौती लोगों में दवा सेवन को लेकर मौजूद संकोच और भ्रांतियाँ हैं। कई लोग स्वयं को स्वस्थ मानकर दवा लेने से इनकार कर देते हैं, जबकि मीडिया सही जानकारी देकर जनता को जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
सीएमओ ने बताया कि फाइलेरिया केवल एक स्वास्थ्य समस्या नहीं, बल्कि गंभीर सामाजिक-आर्थिक संकट भी है। जनपद में वर्तमान में 1334 हाथीपांव एवं 11 हाइड्रोसील मरीज पंजीकृत हैं। यह बीमारी व्यक्ति को आजीवन कमजोर बना देती है, जिससे पूरे परिवार की आजीविका प्रभावित होती है।
टीम की निगरानी में खिलाई जाएगी दवा
एसीएमओ एवं बीवीडी नोडल अधिकारी डॉ. पी.सी. भारती ने बताया कि हालिया नाइट ब्लड सर्वे में तारुन और मयाबजार को संवेदनशील पाया गया है। इसी के मद्देनज़र राज्य मुख्यालय से 12.32 लाख डीईसी, 12.32 लाख आइवरमेक्टिन एवं 4.93 लाख एल्बेंडाजोल टैबलेट उपलब्ध कराई गई हैं।
गर्भवती महिलाओं, दो वर्ष से कम आयु के बच्चों एवं गंभीर रोगियों को छोड़कर सभी पात्र व्यक्तियों को स्वास्थ्य कर्मियों की निगरानी में दवा खिलाई जाएगी, जिससे संक्रमण की श्रृंखला को तोड़ा जा सके।
दवाएं पूरी तरह सुरक्षित
सीफार के प्रतिनिधि ने बताया कि फाइलेरिया एक लाइलाज बीमारी है, जो मच्छरों के माध्यम से फैलती है। इसके लक्षण कई वर्षों बाद हाथ-पैर अथवा जननांगों में सूजन के रूप में सामने आते हैं। फाइलेरिया से बचाव की दवाएं पूरी तरह सुरक्षित एवं डब्ल्यूएचओ से प्रमाणित हैं।
दवा सेवन के बाद हल्का बुखार या चक्कर आना सामान्य है, जो सूक्ष्म कृमियों के नष्ट होने के कारण होता है और शीघ्र ठीक हो जाता है। किसी भी गंभीर स्थिति के लिए रैपिड रिस्पॉन्स टीम तैनात रहेगी। उन्होंने कहा कि दवा न लेना सबसे बड़ा खतरा है, क्योंकि एक संक्रमित व्यक्ति पूरे गांव में संक्रमण फैला सकता है।
जिला मलेरिया अधिकारी मंजुला आनंद ने बताया कि अभियान को लेकर प्रशिक्षण, अंतरविभागीय समन्वय एवं ब्लॉक टास्क फोर्स का गठन पूर्ण कर लिया गया है। पीसीआई एवं सीफार प्रतिनिधियों ने मीडिया से अपील की कि वे जनता तक यह संदेश पहुँचाएँ कि फाइलेरिया दवा से रोका जा सकता है, और दवा न लेने पर यह बीमारी पीढ़ियों तक समस्या बनी रह सकती है।
इस अवसर पर एसीएमओ डॉ. आशुतोष श्रीवास्तव, डिप्टी सीएमओ डॉ. पी.के. गुप्ता, डॉ. दीपक पांडे, डीएचईआईओ डी.पी. सिंह सहित जनपद के अनेक मीडिया प्रतिनिधि उपस्थित रहे।





