
तेहरान: ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई के वरिष्ठ सलाहकार अली शमखानी ने अमेरिकी हमलों पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा, “खेल अभी खत्म नहीं हुआ है।” शमखानी ने अपने ‘एक्स’ (पूर्व ट्विटर) अकाउंट पर लिखा, “भले ही परमाणु स्थल नष्ट हो जाएं, लेकिन संघर्ष का अंत नहीं हुआ है।”
इस बीच, अमेरिका के हमलों को लेकर बुलाई गई संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक में ईरान के राजदूत आमिर सईद इरावानी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अमेरिका को जवाब मिलेगा और ईरान के पास इसका वैध अधिकार है।
अमेरिका पर गंभीर आरोप
इरावानी ने संयुक्त राष्ट्र में कहा, “अमेरिका ने एक शांतिपूर्ण देश की संप्रभुता का उल्लंघन किया है। हमारे पास कोई परमाणु संधि तोड़ने का आरोप नहीं है, फिर भी हम पर हमला किया गया।” उन्होंने अमेरिका पर यह भी आरोप लगाया कि वह मिडिल ईस्ट में आतंकवादियों का खुला समर्थन करता है और गाजा पर इजरायली हमलों को लेकर एक शब्द तक नहीं कहता।
“ईरान चुप नहीं रहेगा”
इरावानी ने दो टूक कहा, “दुनिया भले ही चुप रहे, लेकिन ईरान चुप नहीं रहेगा। अमेरिका मानवता विरोधी गतिविधियों को बढ़ावा दे रहा है और यह अस्वीकार्य है।”
परमाणु वार्ता से पहले हमला
ईरानी राजदूत ने खुलासा किया कि 16 जून को ओमान की राजधानी मस्कट में अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु समझौते को लेकर बातचीत होनी थी, लेकिन इससे ठीक दो दिन पहले 13 जून को इजरायल ने ईरान पर हमला कर दिया। उन्होंने सवाल उठाया, “ऐसे में संधि से पीछे कौन हट रहा है?”
कासिम सुलेमानी की हत्या का मुद्दा फिर उठा
इरावानी ने यूएन में जनरल कासिम सुलेमानी की हत्या का भी जिक्र करते हुए कहा कि “वे ईरान के शीर्ष सैन्य अधिकारी थे, जिनकी हत्या अमेरिका ने की। यह कहां का न्याय है?”
“बदला जरूर लिया जाएगा”
अंत में उन्होंने कहा कि ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघाची यूरोपीय देशों के साथ शांति वार्ता कर रहे थे, लेकिन अमेरिका को यह भी मंजूर नहीं हुआ और उसने हमारे ठिकानों पर हमला कर दिया। “हम इसका जवाब जरूर देंगे,” इरावानी ने चेतावनी दी।
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच यह बयानबाज़ी एक नए टकराव की आहट दे रही है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें अब पश्चिम एशिया पर टिक गई हैं।





