
- रिपोर्ट: स्निग्धा श्रीवास्तव
प्रयागराज: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने अपने खिलाफ दर्ज यौन उत्पीड़न और पॉक्सो (POCSO) मामले में अग्रिम जमानत के लिए इलाहाबाद उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है। अधिवक्ता राजर्षि गुप्ता, सुधांशु कुमार और श्री प्रकाश की ओर से दाखिल यह याचिका प्रयागराज की विशेष अदालत द्वारा एफआईआर दर्ज करने के आदेश के कुछ दिनों बाद दाखिल की गई है। इस याचिका पर शीघ्र सुनवाई की संभावना है।
यह मामला तब सामने आया जब आशुतोष ब्रह्मचारी, जो स्वामी रामभद्राचार्य के शिष्य बताए जाते हैं, ने जिला अदालत में धारा 173(4) के तहत अर्जी दाखिल की। बलात्कार एवं पॉक्सो विशेष न्यायालय के सहायक न्यायाधीश विनोद कुमार चौरसिया ने झूंसी पुलिस को प्रकरण दर्ज कर जांच के निर्देश दिए। अदालत के आदेश के अनुपालन में झूंसी थाने में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, उनके शिष्य मुकुंदानंद गिरि और दो-तीन अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।
पुलिस ने मामला भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 351(3) और पॉक्सो अधिनियम की विभिन्न धाराओं—6, 3, 4(2), 16, 17 तथा धारा 51—के तहत दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। 13 फरवरी को दो नाबालिग शिकायतकर्ताओं के बयान वीडियो रिकॉर्डिंग के माध्यम से अदालत में दर्ज किए गए थे, जिसके बाद अदालत ने पुलिस रिपोर्ट का संज्ञान लेते हुए फैसला सुरक्षित रख लिया था और बाद में एफआईआर दर्ज करने का आदेश जारी किया।
इस बीच, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि यह उनके द्वारा गौहत्या पर प्रतिबंध की मांग से ध्यान भटकाने की “चाल” है। समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में उन्होंने सरकार पर शंकराचार्यों को निशाना बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने यह भी कहा कि मामले में अन्य आरोपियों का उनके गुरुकुल से कोई संबंध नहीं है।
सोमवार को उत्तर प्रदेश पुलिस कथित यौन उत्पीड़न मामले में उन्हें गिरफ्तार करने के उद्देश्य से उनके आवास पर पहुंची थी। मीडिया से बातचीत में स्वामी ने कहा कि वह पुलिस कार्रवाई का विरोध नहीं करेंगे और जांच में सहयोग करेंगे।
उल्लेखनीय है कि प्रयागराज स्थित पॉक्सो अदालत ने हाल ही में नाबालिगों के यौन शोषण के आरोपों के आधार पर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था। अदालत के निर्देश के बाद झूंसी थाने में औपचारिक रूप से मामला दर्ज कर लिया गया है और आगे की जांच जारी है।





