
देशभर में तेजी से बढ़ रहे डिजिटल अरेस्ट स्कैम को गंभीर खतरा मानते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने सीबीआई (CBI) को इन मामलों की विस्तृत और प्राथमिक जांच करने का निर्देश दिया है। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सुर्या कांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने कहा कि ठग अब लोगों को धोखा देने के लिए नए डिजिटल तरीके अपना रहे हैं, जिन पर तुरंत रोक लगाना बेहद जरूरी है।
पहले डिजिटल अरेस्ट स्कैम की जांच, बाकी साइबर अपराध बाद में
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि CBI पहले उन मामलों को प्राथमिकता दे जिनमें सीधे डिजिटल अरेस्ट स्कैम की शिकायत दर्ज हुई है। अन्य साइबरक्राइम से जुड़े मामलों की जांच दूसरी फेज में की जा सकती है। हाल के महीनों में लोगों को डरा-धमकाकर ऑनलाइन पैसे वसूलने की घटनाओं में तेजी से बढ़ोतरी हुई है, जिसके चलते यह कदम अहम माना जा रहा है।
बैंकरों की भूमिका की भी जांच होगी
कोर्ट ने CBI को यह भी अनुमति दी है कि वह इस स्कैम से जुड़े बैंक अधिकारियों की संभावित भूमिका की जांच करे। यदि किसी ठगी में फर्जी या नकली बैंक अकाउंट खुलवाने में बैंकर्स की संलिप्तता मिलती है, तो उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत कार्रवाई हो सकेगी।
साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने RBI से पूछा है कि फर्जी बैंक खातों की पहचान करने में वे कौन-से AI और मशीन लर्निंग टूल इस्तेमाल करते हैं। इसका उद्देश्य भविष्य में ऐसे खातों को समय रहते पकड़कर बड़े साइबर फ्रॉड रोकना है।
टेक कंपनियों, राज्यों और साइबर यूनिट्स को मिलकर काम करने का आदेश
अदालत ने आईटी सर्विस प्रोवाइडर्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से कहा है कि वे CBI की जांच में पूरा सहयोग करें और जरूरत पड़ने पर कंटेंट डेटा उपलब्ध कराएं। पंजाब, तमिलनाडु, उत्तराखंड और हरियाणा सहित कई राज्यों को निर्देश दिया गया है कि वे CBI को पैन-इंडिया स्तर पर जांच करने की अनुमति दें।
इसके साथ ही सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कहा गया है कि वे अपनी साइबर क्राइम यूनिट्स को पूरी क्षमता से संचालित करें और किसी भी चुनौती की जानकारी तुरंत सुप्रीम कोर्ट को दें।
SIM कार्ड पर भी सख्त निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने इस चिंता पर भी जोर दिया कि एक ही नाम पर कई SIM कार्ड जारी किए जा रहे हैं, जिसका स्कैमर्स दुरुपयोग करते हैं। इस पर रोक लगाने के लिए कोर्ट ने टेलीकॉम नेटवर्क में SIM जारी करने की प्रक्रिया पर एक मॉडल प्रोटोकॉल तैयार करने का आदेश दिया है।
अदालत का यह फैसला संकेत देता है कि अब देश की प्रमुख संस्थाएँ मिलकर डिजिटल फ्रॉड और साइबर ठगी के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने जा रही हैं।




