
उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार ने सड़क सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए दोपहिया वाहनों पर कड़े नियम लागू कर दिए हैं। अब बाइक या स्कूटी पर पीछे बैठने वाले व्यक्ति (पिलियन राइडर) के लिए भी हेलमेट पहनना पूरी तरह अनिवार्य कर दिया गया है। सरकार का उद्देश्य सड़क हादसों में होने वाली मौतों और गंभीर चोटों को कम करना है, क्योंकि आंकड़ों के मुताबिक दोपहिया वाहन दुर्घटनाओं में हेलमेट न पहनना एक बड़ी वजह बनता है।
कानूनी प्रावधान क्या कहते हैं
परिवहन आयुक्त किंजल सिंह द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, मोटर वाहन अधिनियम 1988 की धारा 129 के तहत दोपहिया वाहन चालक और पीछे बैठने वाले दोनों को ISI मार्क (BIS प्रमाणित) हेलमेट पहनना जरूरी है। इस नियम का उल्लंघन करने पर धारा 194-डी के तहत कार्रवाई की जाएगी।
जुर्माना और सजा का प्रावधान
हेलमेट न पहनने पर चालक या पिलियन राइडर से ₹1000 तक का जुर्माना वसूला जा सकता है। हालांकि इसकी मुख्य जिम्मेदारी वाहन चालक की मानी जाएगी। गंभीर या बार-बार नियम तोड़ने के मामलों में ड्राइविंग लाइसेंस को तीन महीने तक के लिए निलंबित भी किया जा सकता है।
नई बाइक-स्कूटी खरीदने पर भी बदले नियम
कई रिपोर्ट्स के अनुसार, उत्तर प्रदेश में अब दोपहिया वाहन डीलरों को निर्देश दिए गए हैं कि नई बाइक या स्कूटी बेचते समय ग्राहक को दो ISI मार्क वाले हेलमेट अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराए जाएं—एक चालक के लिए और दूसरा पीछे बैठने वाले के लिए। बिना दो हेलमेट दिए वाहन बिक्री नहीं हो सकेगी। यह नियम केंद्र सरकार के दिशानिर्देशों के अनुरूप है और राज्य में चरणबद्ध तरीके से, विशेष रूप से 2026 से, प्रभावी माना जा रहा है।
पहले से चल रही पहलें
योगी सरकार पहले भी ‘नो हेलमेट, नो फ्यूल’ अभियान चला चुकी है, जिसके तहत बिना हेलमेट वाले दोपहिया वाहन चालकों को पेट्रोल पंपों पर ईंधन नहीं दिया जाता। लखनऊ, नोएडा समेत कई जिलों में इस अभियान को सख्ती से लागू किया गया है और अब इसे पूरे प्रदेश में विस्तार दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सड़क सुरक्षा को लेकर बैठकों में स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि हर साल होने वाली 25 से 26 हजार सड़क दुर्घटना मौतों को रोकने के लिए कड़े फैसले जरूरी हैं। ट्रैफिक पुलिस को सख्त निगरानी, चेकिंग बढ़ाने और उल्लंघन पर तत्काल चालान काटने के आदेश दिए गए हैं। सरकार का मानना है कि हेलमेट के अनिवार्य उपयोग से सिर की चोटों से होने वाली मौतों में 40 से 50 प्रतिशत तक कमी लाई जा सकती है।





