
- रिपोर्ट: अजय सोनकर
वाराणसी: उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के शुद्धिकरण के लिए 4 नवंबर से स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया शुरू हो रही है। यह प्रक्रिया प्रदेश में 22 वर्ष बाद दोबारा लागू की जा रही है, जिसका मुख्य उद्देश्य फर्जी, डुप्लीकेट और अयोग्य मतदाताओं की पहचान कर उन्हें वोटर लिस्ट से हटाना है। चुनाव आयोग ने दावा किया है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और सरल तरीके से संपन्न होगी।
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राज्य चुनाव आयोग ने एसआईआर को लेकर सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों से व्यापक चर्चा की है। मंगलवार से बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) घर-घर पहुंचकर मतदाताओं से संपर्क करेंगे और उन्हें एन्यूमरेशन फॉर्म उपलब्ध कराएंगे। इस फॉर्म में सभी आवश्यक जानकारी भरकर दो प्रतियां जमा करनी होंगी। एक प्रति बीएलओ के पास रहेगी, जबकि दूसरी मतदाता को वापस दी जाएगी।
यदि किसी परिवार का मतदाता घर पर उपस्थित न हो, तो परिवार का कोई अन्य सदस्य या रिश्तेदार संबंध की जानकारी देकर फॉर्म पर हस्ताक्षर कर सकता है। फॉर्म में मतदाताओं को माता-पिता का नाम, मोबाइल नंबर और आधार संख्या जैसी जानकारियां अनिवार्य रूप से भरनी होंगी।
पहले चरण में घर-घर पहुंचेंगे बीएलओ, दस्तावेज बाद में
पहले चरण में बीएलओ घर-घर जाकर एन्यूमरेशन फॉर्म वितरित करेंगे, जिसे भरकर जमा करना होगा। इस段階 में किसी दस्तावेज की आवश्यकता नहीं होगी। बाद में, जिन मतदाताओं का नाम 2003 की वोटर लिस्ट से लिंक नहीं होगा, उन्हें आयोग की ओर से नोटिस जारी किया जाएगा। इसके बाद निर्धारित दस्तावेज जमा करने होंगे।
– 1 जुलाई 1987 से पहले जन्मे मतदाता: यदि उनका नाम 2003 की वोटर लिस्ट में है, तो केवल लिस्ट की कॉपी जमा करनी होगी।
– यदि नाम नहीं है: दिए गए 11 दस्तावेजों में से कोई एक प्रस्तुत करना होगा।
– 1 जुलाई 1987 से 2 दिसंबर 2004 के बीच जन्मे: अपना या माता-पिता का दस्तावेज जमा करना अनिवार्य।



