
- रिपोर्ट: प्रतीक वार्ष्णेय
हाथरस: सिकंदराराऊ के मोहल्ला बारहसैनी में सोमवार को ऐसा नज़ारा देखने को मिला, जिसने नेताओं और प्रशासन की नाकामी को आइना दिखा दिया। पानी में डूबे मोहल्ले में गुस्से से खौल रही जनता ने वो किया, जो अब तक सिर्फ कहानियों में सुनते थे।
गंदगी, बदबू, मच्छरों और कीचड़ से त्रस्त लोगों ने स्थानीय विधायक वीरेंद्र सिंह राणा और नगर पालिका अध्यक्ष मोहम्मद मुशीर कुरैशी की तस्वीरें गंदे पानी में बहाकर अपना विरोध दर्ज कराया। यह सिर्फ एक विरोध नहीं, बल्कि जनता की चुप्पी के टूटने का बिगुल था।
तस्वीरों का बहाव, भरोसे का विसर्जन!
“जब तक वोट चाहिए होते हैं, तब तक नेता घर-घर आते हैं। फिर जनता भले पानी में डूबे रहे, उनकी गाड़ी कीचड़ में नहीं रुकती…”
यह शब्द थे उस बुजुर्ग के, जिनके घर का मुख्य द्वार पिछले दस दिनों से गंदे पानी में डूबा हुआ है।
मोहल्लेवासियों ने विधायक और चेयरमैन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की – “हमारा दर्द नहीं दिखता, तो चेहरों को बहाकर दिखा देंगे!”
“जनता की बस्ती डूबी है, कुर्सियों पर चुप्पी छाई है!”

जलभराव बना बीमारी का घर:
- मोहल्ला बारहसैनी में हफ्तों से भरा है गंदा पानी
- सड़कों की हालत ऐसी कि पैदल चलना भी मुश्किल
- बच्चों को स्कूल भेजना, बुजुर्गों को अस्पताल ले जाना दुर्भर कार्य
- नालियां जाम, सफाई कर्मियों का कोई अता-पता नहीं
- मलेरिया, डेंगू और चमड़ी रोगों की दस्तक शुरू
क्या नगर पालिका की जिम्मेदारी सिर्फ कागजों पर सीमित रह गई है? क्या जनप्रतिनिधि सिर्फ फेसबुक पोस्ट और भाषणों में सक्रिय हैं?
जनता अब चुप नहीं रहेगी। ये तस्वीरों का विसर्जन नहीं, सिस्टम पर सवालों का विस्फोट है।





