
- रिपोर्ट: अनुराग सिंह बिष्ट
लखनऊ। लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) के प्रवर्तन जोन-4 में तैनात अवर अभियंता (JE) हेमंत कुमार एवं सहायक अभियंता (AE) संजय वशिष्ठ की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि त्रिवेणी नगर के सीतापुर मुख्य रोड पर बेसमेंट सहित बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण कराया जा रहा है, जो अब लगभग पूरा होने के कगार पर है। हैरानी की बात यह है कि निर्माण लंबे समय से जारी होने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
इस पूरे मामले में जोन-4 के जोनल अधिकारी प्रभाकर सिंह की भूमिका भी संदेह के घेरे में आ गई है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह सब उनकी जानकारी में हो रहा है या फिर अवर अभियंता और सहायक अभियंता द्वारा उन्हें गुमराह किया जा रहा है। क्षेत्र में यह चर्चा आम है कि जहां “डील” हो जाती है, वहां कार्रवाई नहीं होती और जहां मामला नहीं बनता, वहां सीलिंग की कार्रवाई की जाती है।
अलीगंज सेक्टर-J में भी नियमों की अनदेखी
अलीगंज के सेक्टर-J स्थित C/5, श्री सिद्धि विनायक हॉस्पिटल के बगल में आवासीय क्षेत्र में नियमों और मानकों के विपरीत बड़े बेसमेंट की खुदाई कर व्यावसायिक निर्माण कराया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां अवैध निर्माण के लिए मानो नई नियमावली ही बना दी गई हो। जबकि हाल ही में मंडल आयुक्त ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि अवैध निर्माण करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाए और सीलिंग के बाद निर्माण पाए जाने पर उसे ध्वस्त किया जाए।
कपूरथला सेक्टर-F में भी अवैध व्यावसायिक निर्माण
अलीगंज के कपूरथला क्षेत्र में B1/26 सेक्टर-F में आवासीय भूमि पर अवैध व्यावसायिक भवन का निर्माण तेजी से कराया जा रहा है, जो लगभग पूर्ण हो चुका है। एक ओर एलडीए के वीसी प्रथमेश कुमार और प्रशासन अवैध निर्माण रोकने की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर मौके पर तैनात अधिकारी आदेशों को नजरअंदाज करते दिखाई दे रहे हैं।
सीएम और वीसी के निर्देशों की अनदेखी का आरोप
कुछ दिन पहले मंडल आयुक्त ने अवैध निर्माण को लेकर अधिकारियों को कड़ी चेतावनी दी थी। इसके बावजूद जोन-4 में अवैध निर्माण के मामलों में निरंतर बढ़ोतरी देखी जा रही है। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि अवर अभियंता हेमंत कुमार और सहायक अभियंता संजय वशिष्ठ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और एलडीए वीसी प्रथमेश कुमार के निर्देशों और मिशन को विफल कर रहे हैं।
अब देखना यह है कि उच्च अधिकारी इन गंभीर आरोपों पर क्या संज्ञान लेते हैं और अवैध निर्माण पर कब तक सख्त कार्रवाई होती है।





