
- रिपोर्ट – अनुराग सिंह बिष्ट
लखनऊ, 23 नवम्बर 2025।विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने कहा है कि विद्युत नियामक आयोग द्वारा यूपी पावर कारपोरेशन (UPPCL) के घाटे के आंकड़ों को अस्वीकृत किए जाने के बाद, पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण का निर्णय अब स्वतः ही निरस्त हो जाना चाहिए।
संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि पावर कारपोरेशन ने अपने एआरआर (ARR) में 25 हजार करोड़ रुपये के घाटे का दावा किया था, जबकि विद्युत नियामक आयोग ने विस्तृत जांच के बाद इसे गलत पाया। आयोग के अनुसार वर्ष 2025-26 में सिर्फ 7710 करोड़ रुपये का अंतर रह जाएगा, और वह भी इसलिए प्रभावी नहीं होगा क्योंकि 1 अप्रैल 2025 को निगम के खाते में 18,592 करोड़ रुपये अतिरिक्त जमा थे। यही कारण है कि नियामक आयोग ने इस वर्ष बिजली टैरिफ में कोई वृद्धि नहीं की।
समिति ने कहा कि एक वर्ष पूर्व निजीकरण का निर्णय इसी गलत घाटे के आधार पर लिया गया था, साथ ही दागी ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट ग्रांट थॉर्टन द्वारा तैयार RFP डॉक्यूमेंट भी इन्हीं फर्जी आंकड़ों पर आधारित है। अब जब घाटा ही गलत साबित हो चुका है, तो निजीकरण का फैसला और RFP डॉक्यूमेंट दोनों स्वतः निरस्त होने चाहिए।
संघर्ष समिति ने मांग की है कि—
फर्जी घाटे का आंकड़ा तैयार करने वाले तत्कालीन निदेशक वित्त के खिलाफ FIR दर्ज की जाए
निजीकरण की पूरी प्रक्रिया की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए
RFP डॉक्यूमेंट तुरंत रद्द किया जाए
समिति ने कहा कि वह शुरू से कहती रही है कि पावर कारपोरेशन प्रबंधन फर्जी घाटा दिखाकर पूर्वांचल और दक्षिणांचल डिस्कॉम का निजीकरण थोपना चाहता है। अब विद्युत नियामक आयोग ने इन आरोपों को सही साबित कर दिया है।
27 नवम्बर को देशभर में व्यापक विरोध प्रदर्शन
संघर्ष समिति ने घोषणा की है कि निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन के एक वर्ष पूरा होने पर आगामी 27 नवंबर को—
देशभर के बिजली कर्मचारी और इंजीनियर
यूपी के बिजली कर्मियों के समर्थन में
सभी राज्यों की राजधानियों में
प्रमुख बिजली उत्पादन गृहों पर
वृहद विरोध प्रदर्शन करेंगे।
उत्तर प्रदेश में सभी जनपदों, डिस्कॉम मुख्यालयों और विद्युत परियोजनाओं पर बड़े स्तर पर प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे।
संघर्ष समिति ने कहा कि जब तक निजीकरण का निर्णय वापस नहीं लिया जाता, आंदोलन और अधिक व्यापक और प्रबल होता जाएगा।


