- रिपोर्ट: पंकज झा
वाराणसी: आगामी बरसात और गर्मी के मौसम को देखते हुए नगर निगम ने शहर की सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए बड़े स्तर पर तैयारी शुरू कर दी है। निगम ने 15 जून तक शहर के सभी छोटे-बड़े नालों और सीवर लाइनों की शत-प्रतिशत सफाई का लक्ष्य तय किया है। इसके तहत ढाई करोड़ रुपये की लागत से एक नई सुपर साकर मशीन खरीदने का निर्णय लिया गया है, जिसकी टेंडर प्रक्रिया भी प्रारंभ कर दी गई है।
नगर निगम का यह अभियान न केवल बरसात के दौरान जलभराव की समस्या को रोकने के लिए है, बल्कि गर्मी में पेयजल व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के उद्देश्य से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बेहतर प्रबंधन के लिए नालों को तीन श्रेणियों—ए, बी और सी—में विभाजित किया गया है। ‘ए’ श्रेणी के नालों की सफाई विशेष फांसी मशीनों से की जाएगी, जबकि अस्सी, सुंदरपुर और साकेत नगर जैसे क्षेत्रों में अलग-अलग मशीनों के जरिए सफाई का कार्य होगा।
बड़े नालों की सफाई की जिम्मेदारी सामान्य अभियंत्रण विभाग को सौंपी गई है, जिसे मई के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य दिया गया है। वहीं सीवर लाइनों की सफाई के लिए जेटिंग मशीनों का उपयोग किया जाएगा, ताकि बारिश से पहले जल निकासी व्यवस्था पूरी तरह दुरुस्त हो सके।
निगम ने सफाई कार्य की निगरानी को लेकर भी सख्त व्यवस्था बनाई है। नालों से गाद निकालने की मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी संबंधित जोनल अधिकारियों को दी गई है। खासतौर पर गोदौलिया, सिगरा, पांडेयपुर और रविंद्रपुरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जहां जलभराव की समस्या अधिक रहती है।
इसी के साथ नगर निगम ने सड़कों के किनारे स्थित नालियों को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए भी अभियान चलाने का निर्णय लिया है। महापौर अशोक कुमार तिवारी ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि जहां भी नालियों पर अतिक्रमण है, उसे तत्काल हटाया जाए ताकि जल निकासी में किसी प्रकार की बाधा न आए।
पक्के महाल क्षेत्र के शाही नाले (आरटीएस) की विशेष सफाई के भी निर्देश दिए गए हैं, जिसे शहर के प्रमुख जल निकासी मार्गों में शामिल किया जाता है।
महापौर अशोक कुमार तिवारी ने स्पष्ट कहा कि सीवर और नालों की सफाई में किसी भी प्रकार की लापरवाही या कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण कार्य सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
नगर निगम की इस पहल से उम्मीद जताई जा रही है कि इस बार मानसून के दौरान शहरवासियों को जलभराव की समस्या से काफी हद तक राहत मिल सकेगी।



