
- वरिष्ठ संवाददाता: राजीव आनन्द
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा सरकारी प्राथमिक विद्यालयों के मर्जर (विलय) को लेकर विरोध तेज़ होता जा रहा है। इसी कड़ी में राजधानी लखनऊ स्थित समाजवादी पार्टी (सपा) कार्यालय के बाहर एक पोस्टर लगाया गया, जिसमें लिखा गया—
“ये कैसा रामराज्य? बंद करो पाठशाला, खोलो मधुशाला।”
यह विवादित पोस्टर अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। पोस्टर में योगी सरकार के प्राथमिक स्कूलों के मर्जर फैसले पर कटाक्ष करते हुए शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए गए हैं।
अमेठी के सपा नेता ने उठाई आवाज
इस पोस्टर को जनपद अमेठी निवासी सपा नेता जयसिंह प्रताप यादव द्वारा लगवाया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार लगातार गांव-देहात के सरकारी स्कूलों को बंद या एकीकृत कर रही है, जिससे गरीब बच्चों की शिक्षा पर सीधा असर पड़ रहा है।
जयसिंह प्रताप यादव ने कहा,
“एक ओर सरकार शिक्षा को बढ़ावा देने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर स्कूलों को बंद किया जा रहा है। यह फैसले गरीब और वंचित तबके के खिलाफ हैं।”
विपक्ष का सरकार पर तीखा हमला
सपा सहित अन्य विपक्षी दल इस फैसले को गरीब विरोधी और जनविरोधी बता रहे हैं। उनका आरोप है कि सरकार निजीकरण को बढ़ावा देने के लिए जानबूझकर सरकारी स्कूलों को कमजोर कर रही है।
अब देखना यह है कि योगी सरकार इस विरोध और प्रतीकात्मक पोस्टर पर क्या प्रतिक्रिया देती है और क्या मर्जर नीति पर पुनर्विचार होता है या नहीं।





