
- रिपोर्ट: प्रतीक वार्ष्णेय
सिकंद्राराऊ नगर पालिका दफ्तर में अफसर की कुर्सी पर बैठकर बनाई गई रील पर प्रशासन की कार्रवाई — चपरासी कफील अहमद तत्काल निलंबित, लेकिन संगठन से जुड़ा पूर्व पदाधिकारी अब भी बाहर; अध्यक्ष बोले “साजिश”, सभासदों ने जांच की मांग की, जनता पूछ रही “कानून का रंग पद देखकर क्यों बदलता है?”
हाथरस: सिकंद्राराऊ नगर पालिका परिषद का ‘रील कांड’ अब प्रशासन, राजनीति और जनता के बीच गंभीर सवालों का मुद्दा बन चुका है। नगर पालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी संदीप कुमार सक्सेना ने आदेश (पत्रांक-266, दिनांक 06.08.2025) जारी कर चपरासी कफील अहमद को तत्काल निलंबित कर दिया है।
आदेश में पांच गंभीर आरोप दर्ज हैं —
- ड्यूटी के दौरान अफसर की सीट पर बैठकर रील बनवाना
- अवकाश के दिन बिना अनुमति कार्यालय खोलना
- ड्यूटी में लापरवाही
- उच्चाधिकारियों के आदेश की अवहेलना
- सेवा अनुशासन के नियमों का उल्लंघन
निलंबन अवधि में केवल जीवन निर्वाह भत्ता मिलेगा और 15 दिन में जांच रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है।
मामले का ‘बड़ा चेहरा’ अब भी बेखौफ
वीडियो में जिस युवक को अफसर की कुर्सी पर बैठकर रील बनाते देखा गया — वह नगर पालिका अध्यक्ष के संगठन का पूर्व पदाधिकारी है।
जनता का सवाल है: “जब छोटे कर्मचारी पर कार्रवाई हो सकती है, तो कुर्सी पर बैठने वाले बड़े नाम पर क्यों नहीं?”
अध्यक्ष के बयान बदले, सवाल नहीं
पहले अध्यक्ष ने वीडियो को पुराना बताते हुए आरोपी को “बच्चा” कहकर बचाया, बाद में इसे पालिका की छवि खराब करने की साजिश बताया।
अध्यक्ष का दावा है कि किसी ने जानबूझकर वीडियो बनाकर वायरल किया ताकि नगर पालिका की प्रतिष्ठा को धक्का लगे।
पर सवाल जस का तस — क्या यह जांच सिर्फ कागजों में चलेगी या दोषियों तक पहुंचेगी?
सभासद भी उतरे मैदान में
कुछ सभासदों ने मिलकर ज्ञापन देकर मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद आम लोगों में नाराजगी और गुस्सा साफ दिख रहा है।
“ये मामला सिर्फ कुर्सी का नहीं, कुर्सी के पीछे के दोहरे पैमानों का है। कानून अगर बराबर नहीं, तो भरोसा कैसे होगा?”





