हाथरस बीएसए दफ्तर में “पेंशन घोटाला” – 2010 और 2017 में नियुक्त शिक्षक चढ़े पुरानी पेंशन लिस्ट में
बाबुओं का खेल, अफसर बने मोहरे…!

- रिपोर्ट: प्रतीक वार्ष्णेय
हाथरस: “पुरानी पेंशन” का मीठा सपना देखकर हजारों कर्मचारी सरकार के दरवाज़े खटखटा रहे हैं, लेकिन हाथरस शिक्षा विभाग में बाबुओं ने शासनादेश को मज़ाक बना दिया है।
बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) कार्यालय से जारी लिस्ट में ऐसे नाम शामिल कर दिए गए, जिन्हें देखकर हर कोई दंग रह गया।
- सीरियल नंबर 213 पर अशोक कुमार (नियुक्ति – 2010)
- सीरियल नंबर 28 पर नेहा जौहरी (नियुक्ति – 2017)
स्पष्ट है कि दोनों की नियुक्ति NPS लागू होने के बाद हुई है। फिर भी, पुरानी पेंशन योजना का लाभ देने वाली सूची में उनके नाम कैसे आ गए? जवाब सिर्फ एक – बाबुओं का खेल और अफसर की आंख मूंदकर की गई हरी झंडी!
“बाबू-गिरी” ने उड़ा दी शासनादेश की धज्जियाँ
सूत्रों के अनुसार, यह पूरी लिस्ट पटल सहायक अजीत शर्मा और बाबुओं की मिलीभगत से तैयार हुई। BSA ने बिना जांच-परख के केवल हस्ताक्षर कर दिए। सवाल यह उठता है –
- क्या बाबू की कलम रुपयों से चल रही थी?
- क्या BSA को अपने ही दफ्तर में चल रही “पेंशन मंडी” की खबर नहीं?
- या फिर अफसर भी इस खेल के हिस्सेदार हैं?
शासनादेश बना चुटकुला
28 जून 2024 के शासनादेश में साफ लिखा है कि 1 अप्रैल 2005 से पहले नियुक्त कर्मचारी ही पुरानी पेंशन का विकल्प चुन सकते हैं। फिर भी, 2010 और 2017 में नियुक्त शिक्षकों का नाम लिस्ट में डाल दिया गया।

यानी, सरकारी आदेश को बाबुओं ने कूड़ेदान में फेंक दिया और अपनी मनमानी कर डाली।
जिले के शिक्षक और कर्मचारी भड़क उठे। आवाज बुलंद हो रही है –
“जब 2010 और 2017 में नियुक्त लोग पुरानी पेंशन पा सकते हैं तो बाकी का क्या कसूर?”
अब कर्मचारियों ने सरकार से तत्काल प्रभाव से पटल सहायक और बाबुओं पर कार्रवाई की मांग की है। साथ ही, BSA से भी जवाब तलब करने की मांग तेज हो गई है।
यह सिर्फ लिस्ट की गड़बड़ी नहीं, बल्कि “पेंशन का बड़ा खेल” है। अगर योगी सरकार ने समय रहते सख्त कार्रवाई न की, तो हाथरस शिक्षा विभाग में यह घोटाला और बड़ा रूप ले सकता है।



