
- रिपोर्ट: प्रतीक वार्ष्णेय
हाथरस: पुरानी पेंशन को लेकर बेसिक शिक्षा विभाग का घोटाला थमने का नाम ही नहीं ले रहा। बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) हाथरस ने अपने ताज़ा बयान में कहा कि “लिस्ट में नाम त्रुटिवश (गलती से) चढ़ गया था।” लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि—अगर सचमुच यह “सिर्फ गलती” थी, तो फिर BSA ने उस पूरी लिस्ट पर दस्तख़त क्यों किए और उसे शिक्षकों तक भेजा ही क्यों?
सूत्रों की मानें तो यह मामला सिर्फ़ ‘त्रुटि’ नहीं बल्कि खुला खेल – फर्रुख़ाबादी स्टाइल है, जहां बाबुओं और अफसरों की मिलीभगत से पेंशन की फर्जीबाज़ी को हरी झंडी दी गई।
अब जबकि अख़बारों और मीडिया में खबरें सुर्ख़ियां बनीं, तो BSA ने हड़बड़ी में समस्त खंड शिक्षा अधिकारियों को जांच के आदेश थमा दिए।
लेकिन सवाल यह है कि –जब पहली लिस्ट बनी, तब जांच क्यों नहीं कराई गई?,आखिरकार उस समय बिना जांच किए दस्तख़त किस दबाव में हुए?,और अब क्यों BSA अपने बाबुओं और स्टाफ को बचाने में जुटी हुई हैं?
शिक्षक संगठनों का कहना है कि यह मामला महज़ लापरवाही नहीं बल्कि सीधा-सीधा भ्रष्टाचार है। अगर कार्रवाई नहीं हुई तो यह घोटाला और गहराई तक जाएगा।
क्या हाथरस BSA दफ्तर में “पेंशन के नाम पर बंदरबांट” चल रही है? और अगर नहीं, तो फिर इस पूरे खेल को कौन चला रहा है…?





