
नई दिल्ली— आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में मोबाइल, लैपटॉप और डेस्कटॉप स्क्रीन पर लंबे समय तक काम करने से आंखों से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। आंखों में थकान, जलन और दर्द जैसी शिकायतें आम हो गई हैं। ऐसे में भारत सरकार का आयुष मंत्रालय आंखों की देखभाल के लिए एक प्रभावी आयुर्वेदिक पद्धति बिदालिका के बारे में जानकारी दे रहा है।
आयुर्वेदाचार्यों के अनुसार बिदालिका, जिसे बिडालक भी कहा जाता है, आंखों को पोषण देने और उनकी सुरक्षा करने की एक कारगर आयुर्वेदिक विधि है। यह न केवल आंखों की थकान दूर करती है, बल्कि दृष्टि क्षमता बढ़ाने में भी सहायक मानी जाती है।
बिदालिका आयुर्वेद की ‘क्रियाकल्प’ चिकित्सा पद्धति का हिस्सा है। इस प्रक्रिया में औषधीय जड़ी-बूटियों से बना पेस्ट तैयार कर उसे पलकों को छोड़ते हुए आंखों की बाहरी सतह पर एक निश्चित मोटाई में लगाया जाता है। तय समय बाद इस लेप को हटा दिया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य आंखों की सूजन और दर्द से राहत दिलाना होता है।
यह उपचार आंखों में दर्द, जलन और सूजन को कम करता है तथा पित्त दोष को शांत कर ठंडक प्रदान करता है। बिदालिका स्टाई (अंजननामिका), कंजंक्टिवाइटिस और ब्लेफेराइटिस जैसी समस्याओं में राहत देने में उपयोगी है। इसके अलावा यह दृष्टि सुधारने, आंखों की रोशनी बढ़ाने और रिफ्रैक्टिव एरर्स को मैनेज करने में भी मदद करता है। आंखों की थकान, लालिमा और तेज रोशनी से परेशानी (फोटोफोबिया) जैसी शिकायतों में भी यह लाभकारी माना जाता है। डैक्रियोसिस्टाइटिस और होर्डियोलम जैसी सूजन संबंधी बीमारियों में भी इसके अच्छे परिणाम देखे गए हैं।
आयुर्वेद विशेषज्ञों का कहना है कि नियमित रूप से बिदालिका कराने से आंखें स्वस्थ और मजबूत बनी रह सकती हैं। इसका प्रभाव सीधे आंखों पर पड़ता है, जिससे जल्दी राहत मिलती है। कई शोधों में इसे बैक्टीरियल कंजंक्टिवाइटिस और अन्य नेत्र रोगों में प्रभावी पाया गया है।
हालांकि, आयुर्वेदाचार्य कुछ सावधानियां बरतने की सलाह भी देते हैं। बिदालिका हमेशा योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक की देखरेख में ही करानी चाहिए और इसे खुद से आजमाने से बचना चाहिए। आंखों में घाव, चोट या गंभीर बीमारियां जैसे ग्लूकोमा और रेटिनल डिसऑर्डर होने पर यह उपचार नहीं करना चाहिए। बिदालिका के बाद आंखों को पर्याप्त आराम देना जरूरी है और कुछ समय तक तेज रोशनी व स्क्रीन से दूरी बनाए रखनी चाहिए।




