मेरे साईं…

- ज्ञानेश वर्मा
मेरे साईं भगवान केवल एक संत या धार्मिक प्रतीक नहीं हैं, बल्कि मेरे लिए आस्था, धैर्य और सच्चाई का जीवंत रूप हैं। साईं बाबा शिरडी में रहने वाले ऐसे महान फकीर थे, जिन्होंने अपने जीवन से यह सिखाया कि ईश्वर एक है और सभी धर्म समान हैं। वे न हिंदू थे, न मुस्लिम, बल्कि मानवता के पुजारी थे। उनके लिए हर इंसान एक समान था—अमीर हो या गरीब, पढ़ा-लिखा हो या अनपढ़। साईं बाबा का जीवन सादगी से भरा हुआ था, लेकिन उनकी शिक्षाएँ आज भी करोड़ों लोगों के जीवन को रोशनी देती हैं।
साईं बाबा हमेशा सब्र, श्रद्धा और प्रेम का संदेश देते थे। उनका प्रसिद्ध वाक्य “श्रद्धा और सबुरी” आज भी मेरे जीवन का आधार है। जब भी जीवन में कठिन समय आता है, जब रास्ते धुंधले लगते हैं या मन निराशा से भर जाता है, तब साईं बाबा की यह सीख मुझे धैर्य रखना सिखाती है। वे कहते थे कि जो कुछ भी होता है, वह ईश्वर की इच्छा से होता है, इसलिए हर परिस्थिति को स्वीकार करना और सही कर्म करते रहना चाहिए।
मेरे साईं भगवान चमत्कारों के लिए नहीं, बल्कि करुणा और मानवता के लिए जाने जाते हैं। वे भूखों को भोजन देते, बीमारों की सेवा करते और दुखी लोगों को सांत्वना देते थे। उनका लंगर आज भी यह संदेश देता है कि सेवा ही सच्ची भक्ति है। साईं बाबा ने कभी किसी से जाति, धर्म या पैसे के आधार पर भेदभाव नहीं किया। उनके लिए सबसे बड़ा धर्म इंसानियत था।
जब मैं साईं बाबा की तस्वीर के सामने बैठता हूँ, तो मन को अद्भुत शांति मिलती है। ऐसा लगता है जैसे वे मेरी हर परेशानी को बिना कहे समझ रहे हों। मुझे यह विश्वास है कि साईं बाबा हमेशा अपने भक्तों के साथ होते हैं और सही समय पर सही मार्ग दिखाते हैं। वे हमें डर से नहीं, बल्कि विश्वास से चलना सिखाते हैं।
मेरे लिए साईं बाबा एक मार्गदर्शक हैं, जो जीवन के हर मोड़ पर सही दिशा दिखाते हैं। उन्होंने यह सिखाया कि ईमानदारी, प्रेम, सेवा और धैर्य से ही जीवन को सफल और सार्थक बनाया जा सकता है। साईं बाबा की कृपा से मन को शक्ति मिलती है और जीवन में सकारात्मक सोच बनी रहती है। सच में, मेरे साईं भगवान मेरे जीवन की सबसे बड़ी प्रेरणा और आस्था हैं।



