
रिपोर्ट: अनुराग सिंह बिष्ट
मथुरा: उत्तर प्रदेश में पुलिस एनकाउंटर को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। मथुरा में डीजे संचालक हेमंत शर्मा के साथ हुआ कथित फर्जी एनकाउंटर अब सुर्खियों में है। यह मामला राज्य में चल रहे ‘हाफ एनकाउंटर मॉडल’ की असलियत को उजागर करता दिख रहा है।
पीड़ित परिवार और स्थानीय लोगों का दावा है कि हेमंत को उसकी दुकान से उठाकर जंगल में ले जाया गया, जहां एनकाउंटर का नाटक रचा गया। आरोप है कि पुलिस ने गोली चलाने से पहले कहा, “नाम बोलो और कहो फैक्ट्री चला रहा हूँ।” इसके बाद गोलियों की बौछार कर दी गई और मौके से कारतूस समेटकर मुठभेड़ की स्क्रिप्ट तैयार कर दी गई।
सरकारी आंकड़ों की बात करें तो अब तक यूपी में 14,973 मुठभेड़ें हो चुकी हैं, लेकिन इनमें केवल 238 अपराधी मारे गए, जबकि हजारों को घायल कर ‘हाफ एनकाउंटर’ का रूप दे दिया गया। ऐसे में सवाल उठता है कि बाकी मामलों की सच्चाई क्या है?
मथुरा पुलिस की कार्यशैली पर अब गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों और मानवाधिकार संगठनों ने इस कथित फर्जी एनकाउंटर की न्यायिक जांच की मांग की है।
फर्जी मुठभेड़ों की बढ़ती घटनाओं ने उत्तर प्रदेश के एनकाउंटर मॉडल पर एक बड़ा प्रश्नचिन्ह खड़ा कर दिया है, जिससे न सिर्फ पुलिस की नीयत पर, बल्कि कानून व्यवस्था पर भी जनता का भरोसा डगमगाने लगा है।





