
- वरिष्ठ संवाददाता: राजीव आनन्द
लखनऊ: कॉमरेड सरोज दत्त बंगाल के एक प्रसिद्ध पत्रकार,साहित्यकार व कम्युनिस्ट क्रांतिकारी थे।आप कम्युनिस्ट आंदोलन के नेतृत्व में ब्रिटिश साम्राज्यवाद और उसके दलाल देशीय सामंतवाद के खिलाफ साहित्य के साथ साथ जनसंघर्षों में जबरदस्त रूप से सक्रिय रहे।
४०,५०,६० व ७० दशक में उनकी धारदार लेखनी से तमाम शासक वर्ग के लोग डरते थे। सीपीआई ,सीपीएम के वर्ग समझौतावादी संशोधनवादी लाइन के खिलाफ विद्रोह कर नक्सलबाड़ी विद्रोह के समर्थन में संघर्ष में उतरने वाले बुद्धिजीवियों में वे अग्रिम पंक्ति में थे। २२ अप्रैल १९६९ को बने भाकपा( माले) के वे केंद्रीय कमिटी व पोलित ब्यूरो सदस्य बने।
वे पश्चिम बंगाल राज्य सचिव रहे और राज्य कमिटी मुखपत्र “देशब्रती” के संपादक रहे।पार्टी मुखपत्र में वे शशांक के नाम से दलाल पूंजीपति वर्ग , उनके राजनैतिक दलों,बुद्धिजीवियों और पत्र पत्रिकाओं को अपनी जानदार और आग उगलने वाली लेखनी से धज्जियां उड़ाते थे।तत्कालीन सरकार और शासक वर्ग में इनकी लेखनी से डर व्याप्त था।
५ अगस्त १९७१ को इस महान क्रांतिकारी को कोलकाता पुलिस ने भूमिगत अवस्था में गिरफ्तार कर सुबह सबेरे कोलकाता मैदान में उनका सर धड़ से अलग कर उनकी हत्या कर दी। उस समय मशहूर फिल्म अभिनेता उत्तम कुमार जो तड़के मॉर्निंग वॉक में जा रहे थे ने इस हत्याकांड को देखा।उनकी हत्या की जांच के लिए प्रगतिशील संगठनों की ओर से कई बार जांच की मांग पर आंदोलन भी किया गया।
कॉमरेड सरोज दत्त जो एक शोषण हीन भारत के निर्माण के लिए अपना सर्वस्व निछावर कर दिए ऐसे महान शहीद को ढेरों क्रांतिकारी लाल सलाम।





