
- वरिष्ठ संवाददाता: राजीव आनन्द
लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन सोमवार को एक अलग ही नजारा देखने को मिला, जब समाजवादी पार्टी (सपा) के विधायक अतुल प्रधान ने कांवड़ लेकर विधानसभा परिसर में प्रवेश किया। वे मेरठ की सरधना सीट से विधायक हैं।
कांवड़ पर लिखे थे दो तीखे संदेश
अतुल प्रधान के कांवड़ पर दो ओर दो अलग-अलग संदेश लिखे थे:
- “हमें चाहिए पाठशाला”
- “हमें नहीं चाहिए मधुशाला”
स्कूल मर्जर पर उठाए सवाल
सपा विधायक ने सरकारी स्कूलों के मर्जर और बंद होने के मुद्दे पर सरकार को घेरा। उन्होंने सवाल किया:
“सरकारी स्कूलों को बंद करने का नियम किसने बनाया है? 2019 से स्कूलों को बंद करने का काम शुरू हुआ। आखिर सरकारी स्कूलों में पढ़ता कौन है? ये गरीबों, मजदूरों और छोटे व्यापारियों के बच्चों की शिक्षा का माध्यम हैं।”
शिक्षा बनाम शराब नीति पर निशाना
कांवड़ पर लिखे “मधुशाला” वाले संदेश के जरिए अतुल प्रधान ने परोक्ष रूप से सरकार की शराब नीति पर भी हमला बोला। उनका यह प्रतीकात्मक विरोध शिक्षा व्यवस्था को प्राथमिकता देने की मांग को लेकर था।
📌 संदेश साफ था: गरीबों के बच्चों की शिक्षा को खतरे में डालकर नीतियां न बनाई जाएं। सपा विधायक ने अपने अनोखे विरोध के जरिए सरकार का ध्यान इस गंभीर मुद्दे की ओर खींचने की कोशिश की।





