
- रिपोर्ट: अनुराग सिंह बिष्ट
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश
प्रेस विज्ञ्ञप्ति | 13 अक्टूबर, 2025
लखनऊ: विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने पॉवर कार्पोरेशन प्रबंधन पर आरोप लगाया है कि पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के साथ रिस्ट्रक्चरिंग कर बड़े पैमाने पर पदों को समाप्त करने के बाद प्रबंधन की योजना राजधानी लखनऊ सहित मेरठ, नोएडा, गाजियाबाद, मुरादाबाद,सहारनपुर और कुछ अन्य शहरों की बिजली व्यवस्था फ्रेंचाइजी को देने की तैयारी है।
संघर्ष समिति ने चेतावनी दी है कि हजारों की संख्या में हर संवर्ग के पदों को समाप्त करने से राजधानी लखनऊ की बिजली व्यवस्था ध्वस्त हुई तो इसकी जिम्मेदारी पूरी तरह प्रबंधन की होगी । प्रबंधन को इसके दुष्परिणामों की जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार रहना चाहिए।
संघर्ष समिति ने कहा कि सबसे पहले मेरठ शहर में रिस्ट्रक्चरिंग का प्रयोग किया गया जो पूरी तरह फ्लॉप हो गया है। विधान सभा की प्राक्कलन समिति के अध्यक्ष श्री अमित अग्रवाल ने प्राक्कलन समिति की बैठक में इस व्यवस्था पर सवाल उठाया और पावर कारपोरेशन के चेयरमैन को फटकार लगाई। संघर्ष समिति के संयोजक शैलेन्द्र दुबे ने प्राक्कलन समिति के अध्यक्ष और मेरठ के विधायक श्री अमित अग्रवाल जी से तथा भाजपा के पूर्व अध्यक्ष एवं संसद श्री लक्ष्मीकांत बाजपेई जी से दूरभाष पर इस सम्बन्ध में वार्ता की। दोनों सम्मानित जन प्रतिनिधियों ने स्पष्ट तौर पर कहा कि रिस्ट्रक्चरिंग का प्रयोग गलत है इसे वापस लिया जाना चाहिए।
संघर्ष समिति ने कहा कि यह समझ के परे है कि रिस्ट्रक्चरिंग का प्रयोग मेरठ में विफल हो जाने और सांसदों व विधायकों के विरोध के बावजूद पॉवर कारपोरेशन प्रबन्धन इसी प्रयोग को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में जबरदस्ती थोपने पर क्यों आमादा है ?
संघर्ष समिति ने कहा कि ऐसा लगता है कि पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण में बोली लगाने वाले निजी घरानों को प्रोत्साहन देने के लिए प्रबंधन ने कुछ बड़े शहरों का फ्रेंचाइजीकरण कर इन्हें इन निजी घरानों को सौंपने का मन बना लिया है।
संघर्ष समिति ने कहा कि निजीकरण और फ्रेंचाइजीकरण के नए प्रयोग के पहले पावर कारपोरेशन के चेयरमैन डॉ आशीष गोयल यह बताने की कृपा करेंगे कि आगरा शहर की फ्रेंचाइजी टोरेंट पावर कंपनी को देने के साढ़े पंद्रह साल गुजर जाने के बावजूद टोरेंट पावर कंपनी ने पॉवर कारपोरेशन का 2200 करोड़ रुपए से अधिक का राजस्व का बकाया अभी तक क्यों नहीं दिया है और पॉवर कारपोरेशन ने इस बकाए को वसूलने के लिए आज तक क्या कार्यवाही की है ? पॉवर कारपोरेशन ने अगर आज तक कोई कार्यवाही नहीं की तो टोरेंट पावर कंपनी का फ्रेंचाइजी करार रद्द क्यों नहीं किया गया ? इसके लिए कौन जिम्मेदार है ?
संघर्ष समिति ने कहा कि निजीकरण के उतावलेपन में पॉवर कॉरपोरेशन प्रबन्धन राजधानी की बिजली व्यवस्था पटरी से उतारने पर आमादा है जो बहुत ही गंभीर मामला है। उन्होंने कहा कि अनुभवहीन गैर तकनीकी प्रबंधन को इस प्रयोग के बाद बिजली व्यवस्था की जिम्मेदारी स्वयं लेनी चाहिए और बिजली व्यवस्था चरमराने के बाद बिजली इंजीनियरों या कर्मचारियों पर दोष मढ़ने और उन्हें दण्डित करने के बजाय स्वयं पद छोड़ देने के लिए तैयार रहना चाहिए।
संघर्ष समिति के आह्वान पर आज भी राजधानी लखनऊ के बिजली कर्मियों, जूनियर इंजीनियरों और अभियंताओं ने शक्ति भवन मुख्यालय पर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।
प्रदेश के अन्य समस्त जनपदों में आज व्यापक विरोध प्रदर्शन जारी रहा। मुख्यतया वाराणसी, आगरा, मेरठ, कानपुर, गोरखपुर, मिर्जापुर, आजमगढ़, बस्ती, अलीगढ़, मथुरा, एटा, झांसी, बांदा, बरेली, देवीपाटन, अयोध्या, सुल्तानपुर, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बुलंदशहर, नोएडा, गाजियाबाद, मुरादाबाद में बड़े प्रदर्शन किए गए।


