
वरिष्ठ संवाददाता: राजीव आनन्द
लखनऊ।
65 वर्षीय निर्मला देवी को उनके बेटे आंखों का इलाज कराने के बहाने सिविल अस्पताल में भर्ती कर छोड़ गए। डेढ़ महीने तक अस्पताल में बेसहारा की तरह पड़ी रहीं निर्मला देवी ने जब कोई सहारा न दिखा तो उन्होंने हजरतगंज पुलिस की मदद ली।
रोते हुए थाने पहुंचीं निर्मला देवी की हालत देख एसएचओ विक्रम सिंह ने तुरंत एक्शन लिया और उनके बेटों सूरज यादव और अरविंद यादव को खोजकर थाने बुलाया। दोनों बेटे जब आए तो पुलिस ने उन्हें फटकार लगाई और निर्मला देवी की उनकी जिम्मेदारी बेटो को याद दिलाई।
पुलिस ने सख्त हिदायत दी कि वे अपनी मां की पूरी देखभाल करें और हर 15 दिन में उनकी कुशलता की जानकारी पुलिस को दें। जब मां अपने बेटों के साथ थाने से रवाना हुईं, तो उनकी आंखों में आंसू थे। इस बार दर्द के नहीं, संतोष के आंसू थे।


