
- रिपोर्ट: अनुराग सिंह बिष्ट
लखनऊ: नगर निगम की लापरवाही ने एक बार फिर सुर्खियां बटोरी हैं। पशु कल्याण अधिकारी को आवंटित पंडित ट्रैवेल्स की गाड़ी की बैंक किस्त जमा न होने के कारण बैंक कर्मचारियों ने मौके पर पहुंचकर गाड़ी जब्त कर ली। गनीमत यह रही कि गाड़ी में अधिकारी की बजाय केवल ड्राइवर मौजूद था।
जानकारी के अनुसार, नगर निगम के अधिकारियों के लिए पंडित ट्रैवेल्स की गाड़ियां उपलब्ध कराई गई हैं। पहले भी इन ट्रैवेल्स के ड्राइवरों ने छह महीने से वेतन न मिलने की शिकायत की थी।
अब सवाल उठता है कि जब गाड़ियां नगर निगम के लिए लगाई गई हैं, तो उनकी किस्तों का भुगतान कौन करेगा? क्या नगर निगम समय पर भुगतान नहीं कर रहा, या फिर ट्रैवेल्स कंपनी बैंक की किस्तें जमा करने में नाकाम रही है?
यह घटना न केवल नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि निगम की वित्तीय व्यवस्था कितनी अव्यवस्थित है।




