
- रिपोर्ट: अनुराग सिंह बिष्ट
लखनऊ: राजधानी में अवैध निर्माण पर लगाम लगाने के दावों के बीच लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) का जोन-4 अवैध निर्माण और भ्रष्टाचार का अड्डा बन चुका है। यहां के अभियंता और अधिकारी न केवल नियमों की अनदेखी कर रहे हैं, बल्कि उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार के स्पष्ट आदेशों को भी ठेंगा दिखा रहे हैं।
जोन 4 में भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी, जेई हेमंत कुमार बना मुख्य खिलाड़ी
जोन-4 में तैनात जूनियर इंजीनियर हेमंत कुमार के खिलाफ गंभीर आरोप सामने आए हैं। क्षेत्र के अलीगंज, डालीगंज, फैजुल्लागंज, बक्शी का तालाब और आईआईएम रोड जैसे इलाकों में धड़ल्ले से बिना नक्शे के निर्माण और अवैध प्लाटिंग हो रही है।
सूत्रों के अनुसार, जेई हेमंत कुमार केवल नोटिस जारी करने की खानापूर्ति करते हैं, जिसके एवज में मोटी रकम वसूली जाती है। निर्माण कार्य न केवल जारी रहता है बल्कि एलडीए के अधिकारी और अभियंता आंखें मूंदे बैठे हैं।
सहायक अभियंता संजय वशिष्ठ का भी पूरा सहयोग
खुलासे में यह भी सामने आया है कि सहायक अभियंता संजय वशिष्ठ और हेमंत कुमार की आपसी सांठगांठ से यह पूरा खेल चल रहा है। एलडीए उपाध्यक्ष के सख्त निर्देशों के बावजूद दोनों अभियंता अवैध निर्माण को संरक्षण दे रहे हैं।
एक बड़ा उदाहरण है HIG-33, सेक्टर-E अलीगंज में बन रही बहुमंजिला अवैध व्यावसायिक इमारत, जिसकी न तो कोई नक्शा पास होने की स्पष्ट जानकारी दी जा रही है और न ही निर्माण रोका गया है। जब अभियंताओं से पूछताछ की जाती है तो वे एक-दूसरे पर टालते हुए कहते हैं, “यह अंदर की बात है, समझा करो।”
एक तरफ सीलिंग, दूसरी तरफ संरक्षण – दोहरा मापदंड!
9 अक्टूबर को 29, रविंद्र गार्डन में एक एक-मंजिला अवैध निर्माण को सील किया गया, लेकिन उसी लाइन में बनी छह मंजिला इमारत पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। यह भेदभाव दर्शाता है कि कहां “खर्चा पानी” हुआ और कहां नहीं।
एलडीए के उसी दिन के प्रेस नोट में भी छह मंजिला निर्माण का कोई जिक्र नहीं है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि जानबूझकर इस मामले को दबाया जा रहा है।
सवालों के घेरे में अभियंता और एलडीए की कार्यशैली
जब निर्माण पूरी तरह से अवैध है, तो कार्रवाई क्यों नहीं?
- क्या अभियंताओं की जेब भरने से ही तय होती है अवैध इमारत की “वैधता”?
- क्या एलडीए की “जीरो टॉलरेंस नीति” सिर्फ दिखावा है?
- हजरतगंज से अलीगंज तक भ्रष्टाचार का ट्रांसफर
कुछ समय पहले हजरतगंज में याजदान ग्रुप की अवैध ग्रुप हाउसिंग को एलडीए ने गिरा दिया था। अब उसी तर्ज पर अलीगंज सेक्टर-E में अवैध व्यावसायिक निर्माण किया जा रहा है। फर्क बस इतना है – जगह बदल गई, तरीका वही है।
गरीब जनता होगी सबसे बड़ी पीड़ित
इन अवैध इमारतों में खरीदारी करने वाली आम जनता की गाढ़ी कमाई दांव पर लगती है। एक बार निर्माण पूरा हो जाने के बाद या तो बिल्डिंग गिरा दी जाएगी या कंपाउंडिंग के नाम पर वैध कर दी जाएगी, और जनता ठगी की शिकार रह जाएगी।
और अंत में…
इस खेल में निर्माणकर्ता, जेई हेमंत कुमार, सहायक अभियंता संजय वशिष्ठ और उनके बीच का कोई “सुपरवाइजर” – सब शामिल हैं। अगर किसी उच्च अधिकारी का जमीर जाग गया, तो देखना होगा कार्रवाई किस पर होती है – निर्माता पर, भ्रष्ट अभियंता पर या दोनों पर।
फिलहाल तो अभियंता जेबें भरकर चैन की नींद सो रहे हैं। अधिक से अधिक क्या होगा – एक जोन से दूसरे जोन में ट्रांसफर!
सवाल अब भी वहीं है – क्या एलडीए की जीरो टॉलरेंस सिर्फ एक दिखावा है? या इस बार कोई ठोस कार्रवाई होगी?
(रिपोर्ट: स्थानीय संवाददाता | स्रोत: क्षेत्रीय निरीक्षण और जन शिकायतें)



