
- रिपोर्ट: अनुराग सिंह बिष्ट
लखनऊ: जिस नगर निगम जोन-3 कार्यालय को हाईटेक ऑफिस कहकर गर्व से प्रचारित किया गया था, वही अब लोगों की मुसीबत का नया केंद्र बन गया है। खासकर बुज़ुर्गों और बीमार लोगों के लिए बनी लिफ्ट, अब सुविधा नहीं, सज़ा बनती जा रही है। वजह? बिजली गई नहीं, लिफ्ट ठप। जनरेटर? वो तो हटा ही दिया गया!
👉 लिफ्ट है, पर चलती तभी है जब लाइट हो!
कार्यालय की बहुमंज़िला इमारत में लिफ्ट तो लगाई गई है, लेकिन बिजली कटते ही ये ‘हाईटेक’ लिफ्ट खुद बीमार हो जाती है। हैरानी की बात यह है कि पूरे भवन में कोई बैकअप सिस्टम यानी जनरेटर मौजूद नहीं है। ऐसे में यदि कोई लिफ्ट में फंस जाए, तो उसे निकालने के लिए मैनुअल प्रयास ही एकमात्र विकल्प रह जाता है।
👴 बुज़ुर्गों की पीड़ा: “लिफ्ट में चढ़ें या अंतिम इच्छा मानें?”
जोन-3 कार्यालय में आने वाले बुज़ुर्गों और दिव्यांगों के लिए लिफ्ट एक राहत होनी चाहिए थी, लेकिन अब वह डर और चिंता का कारण बन गई है। कई लोगों ने शिकायत की है कि बिजली गुल होते ही वे लिफ्ट में फंस चुके हैं — और कोई तत्काल मदद नहीं मिलती।
⚡ कर्मचारी बोले: “बैकअप नहीं, सिस्टम बैकफुट पर”
दफ्तर के कर्मचारियों का कहना है कि बार-बार बिजली जाने की समस्या तो है, लेकिन बिना जनरेटर सिस्टम किसी भी वक्त बड़ा खतरा बन सकता है। इसके बावजूद प्रबंधन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
🏢 नगर निगम का विजन 2047, लेकिन 2025 में ही अटका!
जोन-3 नगर निगम के अधिकारी ‘विजन 2047’ और स्मार्ट सिटी के सपने दिखा रहे हैं, लेकिन बुनियादी ज़रूरतों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा। बिना जनरेटर के लिफ्ट, बिना बैकअप के तकनीक — ये हाईटेक कम, हाई रिस्क ज़ोन ज्यादा लगता है।
🚨 सवाल उठते हैं:
- जब लिफ्ट का इस्तेमाल जरूरी है, तो बैकअप क्यों नहीं?
- बुज़ुर्गों की सुविधा के नाम पर खर्च हुआ पैसा, कितना कारगर साबित हो रहा है?
- नगर निगम क्या लोगों की सुरक्षा और सुविधा को लेकर गंभीर है?
निष्कर्ष:
नगर निगम जोन-3 को चाहिए कि सिर्फ तकनीकी दिखावे के बजाय बुनियादी ढांचे को दुरुस्त करे। वरना यह हाईटेक ऑफिस जल्द ही ‘फनी टेक’ का उदाहरण बन जाएगा, जिसमें टेक्नोलॉजी तो है, पर ट्रस्ट नहीं!





