
- वरिष्ठ संवाददाता: राजीव आनन्द
लखनऊ – आजाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमिताभ ठाकुर ने लखनऊ पुलिस पर लोकतांत्रिक अधिकारों के खुले उल्लंघन का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि पुलिस न सिर्फ शांतिपूर्ण विरोध को रोक रही है, बल्कि नागरिक अधिकारों को भी कुचलने का प्रयास कर रही है।
फतेहपुर में अराजकता और पुलिस संरक्षण का आरोप
अमिताभ ठाकुर ने बताया कि फतेहपुर में पुलिस की मौजूदगी में अराजक तत्वों ने खुलेआम तोड़फोड़ और उपद्रव किया, और पुलिस ने न केवल आंखें मूंदी रखीं, बल्कि अप्रत्यक्ष संरक्षण भी दिया। इसी के खिलाफ विरोध स्वरूप उन्होंने गांधी प्रतिमा पर अकेले शांतिपूर्ण बैठने की घोषणा की थी। उन्होंने यह भी मांग की कि दोषी पुलिसकर्मियों को निलंबित किया जाए और दोषियों पर रासुका (NSA) के तहत कार्रवाई की जाए।
पुलिस ने धरना रोकने का दिया नोटिस
आज सुबह गोमतीनगर इंस्पेक्टर ने उन्हें नोटिस देकर गांधी प्रतिमा पर बैठने से मना किया। पुलिस का कहना है कि विधानसभा सत्र चल रहा है और उनके समर्थकों के पहुंचने पर कानून-व्यवस्था और वीआईपी सुरक्षा को खतरा हो सकता है।
अमिताभ ठाकुर की प्रतिक्रिया
अमिताभ ठाकुर ने इस नोटिस को अविवेकपूर्ण और लोकतंत्र विरोधी बताया। उन्होंने कहा कि वह अकेले, शांतिपूर्ण ढंग से कोने में बैठने जा रहे थे, न कोई भीड़ थी और न कोई भाषण। इसके बावजूद जैसे ही वे अपनी कार में बैठकर निकलने लगे, पुलिस ने भारी संख्या में घेरकर उन्हें रोक लिया।
घर के बाहर तैनात पुलिस बल
फिलहाल स्थिति यह है कि अमिताभ ठाकुर के आवास के बाहर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात है। उन्होंने पूछा कि उन्हें किस कानून के तहत रोका गया है, जिस पर पुलिस ने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया, केवल कहा कि स्थिति “शीघ्र स्पष्ट” की जाएगी।
👉 निष्कर्ष: यह मामला एक बार फिर लोकतांत्रिक अधिकारों और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार को लेकर सवाल खड़े कर रहा है। अमिताभ ठाकुर ने ऐलान किया है कि वे संविधानिक और कानूनी रास्ते से अपना विरोध जारी रखेंगे।





