
- रिपोर्ट: अनुराग सिंह बिष्ट
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में स्कूलों के समायोजन की प्रक्रिया के बीच राजधानी लखनऊ के एक सरकारी स्कूल की स्थिति ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस स्कूल में 400 छात्रों पर 29 शिक्षकों की तैनाती की गई है, जो औसत से कहीं ज्यादा है।
यह सवाल उठ रहा है कि क्या वास्तव में 400 छात्रों के लिए 29 शिक्षकों की जरूरत है? या फिर इसके पीछे कोई विशेष कारण या प्रशासनिक चूक है?
जबकि प्रदेश के कई जिलों में ऐसे हजारों स्कूल हैं जो या तो बंद पड़े हैं या एक-दो शिक्षकों के भरोसे चल रहे हैं, ऐसे में एक ही स्कूल में 29 शिक्षकों की नियुक्ति होना व्यवस्था पर सवालिया निशान लगाता है।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह असंतुलन शिक्षक वितरण प्रणाली की खामियों को उजागर करता है। अब यह जांच का विषय है कि क्या इन शिक्षकों ने स्वेच्छा से यह तैनाती ली, या फिर प्रशासनिक स्तर पर कोई लापरवाही हुई है।
शिक्षा विभाग को इस मामले की गंभीरता से जांच करनी चाहिए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि आखिर किस आधार पर इतने शिक्षकों की नियुक्ति की गई और क्या यह प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था की समानता और पारदर्शिता के अनुरूप है या नहीं।





