
- रिपोर्ट: पंकज झा
वाराणसी। उड़ी-उड़ी रे पतंग…—आसमान में लहराती रंग-बिरंगी पतंगों के बीच बनारस में पूरे दिन जमकर पतंगबाजी हुई। मकर संक्रांति के अवसर पर शहर की छतों से लेकर गलियों तक उत्सव का माहौल बना रहा। सुबह से शाम तक लोग छतों पर डटे रहे और आकाश में उड़ती पतंगों के साथ “भकक्काटे” की गूंज सुनाई देती रही। बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों ने इस लोकपर्व को पूरे उल्लास और पारंपरिक अंदाज़ में मनाया, जिससे वाराणसी का आकाश रंगों से भर उठा।
संक्रांति के पावन अवसर पर श्रद्धा और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। तड़के सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु गंगा घाटों पर पहुंचे और विधि-विधान से गंगा स्नान किया। स्नान के उपरांत लोगों ने सूर्यदेव को अर्घ्य अर्पित किया तथा तिल, गुड़, वस्त्र और अन्न का दान कर पुण्य अर्जित किया।
इस अवसर पर घाटों पर धार्मिक अनुष्ठानों के साथ-साथ हर-हर गंगे के जयघोष गूंजते रहे। दान-पुण्य के माध्यम से जरूरतमंदों की सहायता की गई, जिससे पर्व का सामाजिक और मानवीय पक्ष भी सशक्त रूप में सामने आया। संक्रांति के इस पावन पर्व पर काशी में भक्ति, परंपरा और लोकसंस्कृति का अनुपम दृश्य देखने को मिला।





