
- रिपोर्ट: पंकज झा
वाराणसी। कफ सिरप प्रकरण को लेकर पुलिस एवं नारकोटिक्स विभाग की लगातार कार्रवाई से दवा व्यापारियों में मचा हड़कंप अब न्यायालय की दहलीज तक पहुँच गया है। शहर के करीब 10 दवा व्यापारियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता श्रीनाथ त्रिपाठी ने वाराणसी न्यायालय में आवेदन दाखिल कर अफवाहों पर रोक तथा पुलिस की अंधाधुंध दबिश पर नियंत्रण की मांग की है। रविवार को भेलूपुर स्थित अपने चेंबर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने पूरे प्रकरण पर विस्तृत जानकारी दी।
अधिवक्ता त्रिपाठी ने कहा कि “बनारस और काशी को एक सुनियोजित तरीके से बदनाम किया जा रहा है, जबकि व्यापारियों ने केवल लाइसेंस, उचित प्रपत्र और वैध माध्यम से कफ सिरप खरीदा है। भुगतान भी ऑनलाइन किया गया, फिर भी उन्हें लगातार परेशान किया जा रहा है।”
प्रेस कॉन्फ्रेंस में रखे गए प्रमुख तथ्य
- 1. व्यापारियों ने वैध दस्तावेजों और निर्धारित प्रक्रिया के तहत कफ सिरप खरीदा, जिसे न तो किसी प्रकार से प्रतिबंधित घोषित किया गया है और न ही नारकोटिक्स श्रेणी में रखा गया है।
- 2. पूरा स्टॉक ट्रांसपोर्ट माध्यम से आया तथा प्रत्येक ऑर्डर का भुगतान ऑनलाइन दर्ज है।
- 3. इसके बावजूद कई दुकानों और घरों पर पुलिस द्वारा देर रात तक दबिश दी जा रही है, जिससे व्यापारियों में भय का माहौल है।
कोर्ट में दाखिल आवेदन में मुख्य मांगें
- 1. दवा व्यापारियों पर लगाए गए झूठे, बेबुनियाद और मनगढ़ंत आरोपों को समाप्त किया जाए।
- 2. पुलिस द्वारा की जा रही अंधाधुंध तलाश, दबिश और उत्पीड़नात्मक कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाई जाए।
- 3. संबंधित मुकदमे में आरोपों की स्पष्ट एवं विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराई जाए तथा प्रार्थीगण को न्यायसंगत अभिरक्षा का संरक्षण प्रदा 3. न किया जाए।
त्रिपाठी ने यह भी कहा कि “काशी के व्यापारियों ने कानून का पालन करते हुए व्यापार किया है। उनके खिलाफ अफवाहें फैलाना अनुचित है। प्रशासन को चाहिए कि वे व्यापारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करे और तथ्यों के आधार पर कार्रवाई करे।”
सोमवार को होगी सुनवाई
इस महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई सोमवार को वाराणसी कोर्ट में निर्धारित है। न्यायालय अब यह तय करेगा कि अफवाहों और पुलिसिया दबिश पर किस सीमा तक रोक लगाई जाए तथा व्यापारियों की सुरक्षा और कारोबारी हितों की रक्षा कैसे सुनिश्चित की जाए।


