
- रिपोर्ट: प्रतीक वार्ष्णेय
हाथरस: जब शहर दीपों की चमक में डूबा था और लोग उत्सव की खुशियों में मग्न थे, उसी समय मानवता की असली रोशनी लेकर मैदान में उतरे शहर के चर्चित समाजसेवी एवं फोकस ग्रुप के निदेशक डॉ. विकास कुमार शर्मा। प्रकाश पर्व पर उन्होंने दिखा दिया कि असली उजाला दीपों से नहीं, सेवा और संवेदना से फैलता है।
कड़कड़ाती सर्दी में ठिठुरते जरूरतमंदों के लिए डॉ. शर्मा किसी फरिश्ते से कम नहीं रहे। उन्होंने शहर के कोने-कोने में पहुँचकर 151 जरूरतमंद पुरुषों को कंबल और 100 महिलाओं को शॉल भेंट कीं। नवग्रह मंदिर से लेकर गोपेश्वर मंदिर, गांधी पार्क तिराहा, सादाबाद गेट, चामड़ गेट और बौरेहे वाली देवी मंदिर तक—हर जगह सेवा की गर्माहट साफ महसूस हुई।
कंबल और शॉल मिलते ही जरूरतमंदों के चेहरों पर जो राहत और मुस्कान उभरी, उसने सर्द रात में भी माहौल को भावुक कर दिया। लोग कहते दिखे—
“ऐसे ही लोग समाज की असली पहचान होते हैं।”
इस सेवा अभियान में योगा पंडित जी, सुनील कुमार शर्मा एडवोकेट (बंटे भैया) सहित कई नामचीन समाजसेवी मौजूद रहे, जिन्होंने डॉ. शर्मा की पहल को खुलकर सराहा।
डॉ. विकास कुमार शर्मा ने साफ शब्दों में कहा—
“प्रकाश पर्व केवल दीप जलाने का नहीं, बल्कि हर उस चेहरे पर मुस्कान लाने का पर्व है जो ठंड और अभाव से जूझ रहा है। मानव सेवा से बड़ा कोई धर्म नहीं।”
कार्यक्रम पूरी तरह अनुशासित, शांत और भावनात्मक माहौल में सम्पन्न हुआ। शहरभर में इस सेवा कार्य की चर्चा रही और लोग कह उठे—
“यही है असली प्रकाश पर्व!”





