
- मिर्जापुर पुलिस ने नहीं किया अब तक लगभग 200करोड़ का खुलासा,खुलेआम घूम रहा साइबर ठग मनोज अग्रहरि और उसका मास्टर माइंड बेटा अंश
- पुलिस की जानकारी में हुई साइबर ठगी,मुंहचलका पर छोड़ा गया था आरोपी
- 9 जुलाई को कटरा कोतवाली में बैठाया गया था आरोपी राजू अग्रहरि उर्फ मनोज जहां उसकी मोबाइल को कटरा कोतवाली में अब तक रखा गया है जप्त/और आरोपी को छोड़ दिया गया खुलेआम
- रिपोर्ट: चन्दन दुबे
मिर्जापुर: साइबर ठगी को लेकर नए-नए कांड आए दिन सामने आते रहते हैं जहां इससे सुरक्षित रहने के लिए प्रशासनिक व्यवस्था की तरफ से डिजिटल–मीडिया और अन्य प्लेटफार्म के द्वारा ठगो से बचने की हिदायत भी दी जाती है। पर ठगो के छलावे में आकर लोग बहक जाते हैं। हम बात कर रहे हैं अभी हाल ही में लगभग अनुमानित मिर्जापुर जिले से हुए 200 करोड रुपए की साइबर ठगी की। जहां पुलिस को इस मामले में पूर्व में ही सारी घटनाओं की सूचना थी, पर न जाने पुलिस ने किन मजबूरी या कोई षड्यंत्र के चक्कर में इस मामले पर तत्काल कोई बड़ा एक्शन नहीं लिया और मिर्जापुर में करीब अनुमानित हजारों की संख्या में लोगों से करोड़ों रुपए की ठगी करवा बैठी। जहां ऑनलाइन गेमिंग प्लेट फॉर्म के ठगो के द्वारा सतर्क होते ही रफू चक्कर हो गए। MM कंपनी के ऑनलाइन वेबसाइट बनाकर₹1 लगाओ ₹100 कमाओ का लालच देकर लोगों से पैसा इन्वेस्ट करने के लिए मिर्जापुर में MM कंपनी ने यही के स्थानीय कई लोगों को कर्मचारी के रूप में बकायदे नियुक्त किया था जिसका आई कार्ड उनकी नियुक्ति का प्रमाण पत्र है शिकायतकर्ता के द्वारा प्रमाणित रूप से थाने में दिया गया है।
कांड का असली जड़: एम.एम. कंपनी का जाल/और पुलिस की लापरवाही
शिकायतकर्ता ने बताया कि मिर्जापुर में एम.एम. कंपनी के नाम से एक ऑनलाइन वेबसाइट लॉन्च की गई, जिसका नारा था—“₹1 लगाओ, ₹100 कमाओ।” इसी लालच में हम और कई स्थानीय हजारों के करीब लोग फंस गए। बताया जाता है कि कंपनी में स्थानीय कर्मचारियों को दिल्ली से ट्रेनिंग देकर बाकायदा आईडी कार्ड जारी किए गए और लोगों को यह विश्वास दिलाया गया कि यह अर्ध-सरकारी संस्था है, जो आरबीआई और जीएसटी के दिशा-निर्देशों के मुताबिक काम करती है। जहां पीड़ित लोगों के द्वारा बताया गया कि उनका जो भी पैसे आते थे वह जीएसटी काटकर ही मिलता था।
वही बताते चले कि इस फ्रॉड कम्पनी के द्वारा स्थानीय लोगों को फ्रंटलाइन पर रखा गया, ताकि व लोगों का भरोसा मजबूत कर सके और लंबा इन्वेस्ट करा सकेंगे। वही इस मामले में सूत्रों से ज्ञात हुआ कि इस तरह से हजारों निवेशकों से धीरे-धीरे लगभग 200 करोड़ रुपये इन्वेस्ट कराकर कमाने का लालच दिया गया और जैसे ही ठगी का भंडाफोड़ होने लगा, तो कंपनी के संचालक ने एक बड़ा ऑफर देकर लोगों से बड़ा पेमेंट निवेश कराते हुए सुनिश्चित समय में रफूचक्कर हो गए।
!!प्रशासनिक जिम्मेदारों को पहले से थी सूचना, फिर भी ढिलाई क्यों बरती?!!
बताते चले कि मामले की गंभीरता यहीं खत्म नहीं होती। विश्वसनीय सूत्रों ने बताया कि ने पुलिस को पहले से ही इस ऑनलाइन फिक्स्ड डिपॉजिट ठगी की जानकारी थी, लेकिन तत्काल कार्रवाई नहीं किया गया। बताया जा रहा है कि 9 जुलाई को कटरा कोतवाली कोतवाल अजीत सिंह के द्वारा एक आदेश पर कांस्टेबल मनोज यादव व अन्य सिपाहियों के द्वारा आरोपी राजू अग्रहरि उर्फ मनोज अग्रहरि को कोतवाली में बैठाया गया था , जहां ऑनलाइन गेम को संचालित करने वाले वेबसाइट को संचालित मोबाइल जिसे पुलिस ने जप्त किया, मगर आरोपी को आश्चर्यजनक रूप से उसे मुचलके पर छोड़ दिया गया।

वही सूत्रों के द्वारा दिलचस्प जानकारी यह मिली है कि जब साइबर क्राइम की जानकारी कटरा कोतवाली के कोतवाल साहब को साइबर क्राइम शाखा के कांस्टेबल ने जांच कर के इस नेटवर्क की पूरी जानकारी दी थी, तो फिर भी पुलिस ने मुख्य आरोपियों को पकड़ने की बजाय सिर्फ एक आरोपी—रूपेश खत्री—को ही गिरफ़्तार किया इस पर आरोप है कि मिर्जापुर में वेबसाइट लॉन्च कराने में सीधी भूमिका थी। जहां और अन्य आरोपियों को खुलेआम छोड़ दिया गया है।
!!शिकायतकर्ता आलोक ने कहां पुलिस आश्वासन दे रही है आरोपी खुलेआम घूम रहा!!—
कटरा कोतवाली के भैंसैया टोला निवासी आलोक श्रीवास्तव उर्फ बच्चा लाला ने पुलिस को लिखित तहरीर दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि 3 जुलाई 2025 से 20 जुलाई 2025 के बीच , मनोज अग्रहरि और रिंकू यादव निवेशकों को भरोसा दिलाने और गारंटी देने वाला। ने उन्हें यह कहकर ₹3,50,000/- निवेश करने पर भरोसा दिलाया कि कंपनी सरकारी गाइडलाइन के अनुसार काम कर रही है और मोटा मुनाफा देगी।पैसा डूबेगा नहीं,उसकी जिम्मेदारी हमारी है, लेकिन अचानक कम्पनी का ऐप बंद हो गया और इसके बारे में जब इन लोगों से बात की गई तो अंश अग्रहरि और भाई साहिल अग्रहरि पुत्र मनोज अग्रहरि उर्फ राजू पावरोटी वाले व रिंकू यादव ने बताया कि एप में अभी कुछ टेक्निकल इश्यूज चल रहे हैं जिसे लेकर आईटी सेक्टर में वर्क चल रहा है जल्द ही एक दो दिन में ऐप सही हो जाएगा तो सभी निवेशकों का समय पर पैसा दे दिया जाएगा लेकिन समय बीतता चला गया जब इन लोगों से पैसे की वापसी मांगी, तो उन्हें टाल-मटोल और पैसा न देने की धमकी दी। और कहां की पुलिस प्रशासन को इतना पैसा मिला दिया जाएगा कि यह मामला कहीं भी नहीं उठा पाओगे। न्याय की उम्मीद से पीड़ित ने बताया कि तमाम लोगों से यह एक योजना वृद्धि तरीके से ठगी और अपराध किया गया है। पीड़ित का कहना है कि प्रमाण के आधार पर उच्च स्तरीय जांच कर इस मामले में जल्द से जल्द कार्यवाही कर पैसा दिलवाया जाए, और आरोपियों अपराधियों को पड़कर सख्त सजा दिया जाए जिससे कि आगे भविष्य में किसी भी प्रकार की लोगों से कोई भी ठगी करने से पहले यह लोग सौ बार सोचो।
!!बड़ा सवाल क्या कर रहे थे जिम्मेदार—क्या मिलेगा न्याय पकड़े जाएंगे अपराधी या…..!!
जब मामला 420 जैसे गंभीर अपराध का था तो जिले के आला अधिकारियों ने ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की? मुख्य आरोपी को जमानतनुमा राहत और पुलिस सुरक्षा का कारण क्या था? साइबर क्राइम शाखा के पास पूरी जानकारी होने के बावजूद जनता को करोड़ों का चूना कैसे लग गया?
जनता कह रही है कि सरकार डिजिटल इंडिया, साइबर सुरक्षा और ऑनलाइन पारदर्शिता की बड़ी-बड़ी बातें करती है, लेकिन मिर्ज़ापुर का यह कांड बताता है कि ऊँची दुकान फीका पकवान जैसा कानून का व्यवस्था क्यों रहा इस पूरे प्रकरण ने मिर्ज़ापुर की कानून व्यवस्था की पोल खोल दी है। आम जनता और पीड़ित निवेशक यह जानना चाहते हैं कि क्या पुलिस और प्रशासन अपराधियों के प्रति मेहरबान हैं या उनके हाथ मजबूर हैं। वही इस प्रकरण पर प्रशासनिक पक्ष जानना हुआ तो सिटी सीओ से तो कई बार फोन करने पर उनका फोन खबर लिखने व प्रसारित करने तक रिसीव नहीं हुआ न ही बैक कॉल किया गया उनके द्वारा।





