
- रिपोर्ट: पंकज झा
वाराणसी भारतीय रेल पर पार्सल बिजनेस को विस्तार एवं बढ़ावा देने के क्रम में व्यापारियों एवं किसानों को छूट देते हुए पूर्व की नीतियों में संशोधन किया गया है, जिससे एग्रीगेटर के तौर पर रजिस्ट्रेशन की शर्तो में बड़ी छूट दी जा रही है। यह छूट पूर्वोत्तर रेलवे सहित सभी क्षेत्रीय रेलों पर दिया जा रहा है, जिससे अधिक से अधिक संख्या में लोग इसका लाभ उठा सके। पार्सल बिजनेस को बढ़ाने हेतु पार्सल स्पेस लीजिंग के ई-नीलामी हेतु पुराने प्रावधानों जैसे-टर्नओवर, बैलेंस शीट, प्रॉफिट एण्ड लॉस आदि एंट्री बैरियर को हटा दिया गया है तथा जॉइंट पार्सल प्रोडक्ट-रैपिड कार्गो सर्विस योजना के अन्तर्गत वित्तीय मानदंड को शिथिल कर दिया गया है।
पिछले वित्तीय वर्ष के दौरान लॉजिस्टिक, कार्गो/कूरियर हैंडलिंग और
ट्रांसपोर्टेशन बिज़नेस के लिए 50 लाख रुपये के नेट टर्नओवर का प्रावधान को हटा दिया गया है। जो व्यापारी या किसान फ्रेट फॉरवर्डर्स/ट्रांसपोर्टर्स को एग्रीगेटर्स के रूप में पैनल में शामिल करवाना चाहते है, उनके लिए पंजीकरण शुल्क में सुविधा देते हुए शुल्क को 20,000 रुपये +जीएसटी की एम्पैनलमेंट फीस को घटाकर आधा यानि कि 10,000 रुपये +जीएसटी कर दिया गया है।
पार्सल कार्गो एक्सप्रेस ट्रेन (पीसीइटी) में संचालन हेतु पात्रता मानदंड में सुधार किया गया है। रजिस्टर्ड लीजहोल्डर और अन्य जिनका पिछले तीन वित्तीय वर्षां में सालाना टर्नओवर 10 करोड़ रुपये अनिवार्य था, इस सीमा को हटा दिया गया है, अब सभी रजिस्टर्ड लीजहोल्डर ओपन टेण्डर में भाग लेने के लिए पात्र होंगे। इससे पार्सल बिजनेस को गति मिलेगी।





