
- रिपोर्ट: प्रतीक वार्ष्णेय
हाथरस: जनपद के मेंडु क्षेत्र से दर्जनों आम के बाग रहस्यमयी तरीके से गायब हो गए हैं। सवाल उठता है — क्या ये बचे हुए कुछ बाग भी जल्द काट दिए जाएंगे? जिम्मेदार कौन है — वन विभाग या लकड़ी माफिया?
रतनगढ़ी में नहर किनारे रातों-रात कटे आम के पेड़
रतनगढ़ी गांव के पास नहर के किनारे बीती रात वन माफिया ने लगभग डेढ़ दर्जन हरे-भरे आम के पेड़ों को काट डाला। यह घटना वन विभाग की लापरवाही या फिर उसकी माफियाओं से मिलीभगत की ओर इशारा करती है।
हाथरस में बेलगाम है लकड़ी माफिया का नेटवर्क
जिले में शायद ही कोई दिन ऐसा गुजरता हो जब हरे पेड़ न काटे जाते हों। सरकारी आंकड़ों और अभियानों के बावजूद हकीकत यह है कि वन माफिया बेखौफ अपने काम में लगे हैं और वन विभाग मूकदर्शक बना हुआ है।
सूरतपुर में परमिशन की आड़ में पेड़ों का नरसंहार
सूरतपुर गांव में 16 पेड़ों की कटाई की अनुमति ली गई थी, लेकिन हकीकत में 50 से अधिक हरे आम के पेड़ काट दिए गए। हैरानी की बात यह है कि बाकी बचे पेड़ों पर भी खतरा मंडरा रहा है।
सरकार के प्रयास, लेकिन विभाग की साख पर सवाल
उत्तर प्रदेश सरकार हर साल करोड़ों पौधे लगाने का दावा करती है ताकि पर्यावरण संतुलन बना रहे, लेकिन जब जिले में वन विभाग के कुछ कर्मचारी ही पैसे के लालच में हरे पेड़ों की कटाई को बढ़ावा दें, तो ये प्रयास बेमानी लगने लगते हैं।
अब निगाहें जिम्मेदार अधिकारियों पर
अब देखना यह है कि रतनगढ़ी और सूरतपुर में हुए इस अवैध कटान पर जिम्मेदार अधिकारी क्या कार्रवाई करते हैं? क्या बन माफिया और वन कर्मियों की साठगांठ उजागर होगी या यह मामला भी अन्य मामलों की तरह ठंडे बस्ते में चला जाएगा?





