
- रिपोर्ट: अनुराग सिंह बिष्ट
गोरखपुर: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के पिपराइच थाने में तैनात महिला सब इंस्पेक्टर अंकिता पांडेय को एंटी करप्शन टीम ने 10 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। यह रकम उन्होंने एक व्यक्ति का नाम मुकदमे से हटाने के एवज में ली थी।
जैसे ही नकद रिश्वत की रकम का पैकेट SI को दिया गया, एंटी करप्शन टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उन्हें मौके पर ही पकड़ लिया। बताया जा रहा है कि इस पूरे ऑपरेशन की पहले से योजना बनाई गई थी और शिकायत के आधार पर महिला दरोगा को ट्रैप किया गया।
🔸 अभी प्रशिक्षण काल में थीं महिला दरोगा
SI अंकिता पांडेय की नियुक्ति वर्ष 2023 में हुई थी और वे अभी प्रशिक्षण अवधि में ही थीं। उनकी सेवानिवृत्ति की तिथि 28 मार्च 2059 निर्धारित है। ऐसे में यह सवाल उठना लाज़िमी है कि नौकरी की शुरुआत में ही इस तरह का भ्रष्ट आचरण कैसे और क्यों?
🔸 जनता में आक्रोश, कार्रवाई की मांग
इस घटना के सामने आने के बाद आम जनता और सोशल मीडिया पर लोग कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि—
“जब एक प्रशिक्षु ही रिश्वत लेने लगे, तो सिस्टम कैसे सुधरेगा?”
कई लोगों ने ऐसे पुलिसकर्मियों को बर्खास्त करने की बात कही है ताकि अन्य अधिकारियों को भी कड़ा संदेश जाए।
🔸 क्या होगा अगला कदम?
फिलहाल एंटी करप्शन टीम द्वारा महिला SI के खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। विभागीय जांच के बाद SI अंकिता पांडेय पर सस्पेंशन या बर्खास्तगी जैसे कठोर कदम उठाए जा सकते हैं।
निष्कर्ष:
प्रशिक्षण काल में ही रिश्वत लेते पकड़ी गई इस महिला दरोगा की गिरफ्तारी ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ क्या वाकई पर्याप्त निगरानी और सख्ती है? उम्मीद है कि इस मामले में कठोर कार्यवाही की जाएगी, ताकि पुलिस विभाग की साख बनी रहे।



