
- रिपोर्ट- प्रतीक वार्ष्णेय
हाथरस के शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार ने गहरी जड़ें जमा ली हैं?
इस सवाल को जन्म दिया है उस शिकायती पत्र ने, जिसमें जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय में तैनात वरिष्ठ लिपिक श्री अजीत शर्मा पर भ्रष्टाचार, फाइलों में हेराफेरी और विभागीय दुरुपयोग जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
इस पूरे मामले को उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान ने संज्ञान में लेते हुए जिलाधिकारी, हाथरस को जांच के स्पष्ट निर्देश दिए हैं। अब इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराना जिला प्रशासन की जिम्मेदारी बन गई है।
यह मामला उस समय प्रकाश में आया जब श्री सिद्धार्थ कुमार पुत्र हर स्वरूप सिंह, निवासी नगला बाबू, मुरसान, जनपद हाथरस ने दिनांक 15 मई 2025 को एक विस्तृत शिकायत पुलिस अधीक्षक (अभिसूचना), सतर्कता अधिष्ठान लखनऊ को ई-मेल के माध्यम से भेजी। शिकायत के आधार पर सतर्कता अधिष्ठान आगरा ने पत्र संख्या स०अ०/आ०से/शि०प्रा० पत्र-29/2025 के माध्यम से डीएम को निर्देशित किया है कि आरोपों की जांच सक्षम अधिकारी से कराकर रिपोर्ट लखनऊ मुख्यालय को भेजी जाए।
शिकायत में लगाए गए प्रमुख आरोप हैं:
विभागीय फाइलों में मनमानी और दस्तावेजों की हेराफेरी,
वित्तीय लेन-देन में गड़बड़ी और पारदर्शिता की कमी,
पद का दुरुपयोग करते हुए नियमों की अवहेलना,
इन आरोपों ने न केवल शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि प्रशासन की जवाबदेही को भी कटघरे में खड़ा किया है।
शिक्षा विभाग की साख दांव पर
जिस विभाग से बच्चों का भविष्य जुड़ा हो, वहां पर यदि भ्रष्टाचार की बू भी आए तो यह चिंता का विषय है। जिले भर के शिक्षकों, अभिभावकों और सामाजिक संगठनों में इस प्रकरण को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
अब गेंद हाथरस जिलाधिकारी के पाले में
सतर्कता अधिष्ठान की चिट्ठी के बाद अब इस पूरे मामले की जांच डीएम स्तर पर कराई जाएगी।
सवाल यही है —क्या जांच निष्पक्ष होगी?
क्या दोषी बचेंगे नहीं और बेगुनाह फंसेंगे नहीं?
जवाबदेही अब प्रशासन पर है।
यह प्रकरण केवल एक कर्मचारी या एक कार्यालय की बात नहीं है, बल्कि शिक्षा की जड़ में लगते दीमक की पहचान का मामला है।
अब देखना है कि जिला प्रशासन कितनी तत्परता से, कितनी पारदर्शिता से और कितनी ईमानदारी से इस केस की जांच करता है।





