
- रिपोर्ट: पंकज झा
वाराणसी। धार्मिक नगरी काशी अब केवल गंगा, घाट और मंदिरों के लिए नहीं जानी जाती, बल्कि जुआड़ियों के लिए भी यह एक सुरक्षित ठिकाना बन चुकी है। जैतपुरा थाना क्षेत्र में जुए का संगठित नेटवर्क इस कदर मज़बूत हो चुका है कि कानून-व्यवस्था यहां केवल काग़ज़ों तक सिमटकर रह गई है।
सुबह 11 बजे से ही जुआड़ियों की आमद शुरू हो जाती है। यह दृश्य किसी अवैध गतिविधि का नहीं, बल्कि किसी सरकारी कार्यालय के समय-सारिणी जैसा प्रतीत होता है। सूत्रों के अनुसार जैतपुरा में दो बड़े जुआ अड्डे पूरी शान से संचालित हो रहे हैं—
छोहरा छमुहानी स्थित खंडहर और सिटी स्टेशन के सामने हनुमान मंदिर के बगल बंगाली दादा का मकान।
यहां आस्था और अपराध का अनोखा संगम देखने को मिलता है।
करोड़ों का अवैध कारोबार, लाखों की रोज़ाना कमाई
स्थानीय सूत्रों का दावा है कि इन दोनों अड्डों पर प्रतिदिन एक करोड़ रुपये से अधिक का दांव लगाया जाता है। वहीं संचालक रोज़ाना दो लाख रुपये तक की अवैध कमाई कर लेते हैं।
इस पूरे नेटवर्क का संचालन निखिल जायसवाल उर्फ निक्की नामक व्यक्ति कर रहा है, जो स्वयं जैतपुरा थाना क्षेत्र का निवासी बताया जा रहा है। उसके “जुए के स्टार्टअप” में सुबह से रात तक जुआड़ियों की भारी भीड़ लगी रहती है।
छोटे जुआड़ी पर सख़्ती, बड़े माफ़िया पर मेहरबानी
वाराणसी पुलिस की कार्यशैली पर अब गंभीर सवाल उठने लगे हैं। टोटो, टेंपो या सगड़ी पर 500–1000 रुपये का जुआ खेलने वालों पर तो कानून पूरी सख़्ती से टूट पड़ता है, लेकिन जहां करोड़ों का खेल चल रहा है, वहां पुलिस की नज़र अचानक कमज़ोर हो जाती है।
स्थानीय लोगों का कहना है—
“या तो पुलिस को सब कुछ दिखता नहीं, या फिर जानबूझकर अनदेखी की जाती है।”
जांच सिर्फ़ फाइलों में, ज़मीन पर शून्य
जब कभी मीडिया में खबर आती है या सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर मामला उछलता है, तो अधिकारी बयान देते हैं—
“जांच कर कार्रवाई की जाएगी।”
लेकिन यह जांच अक्सर काग़ज़ों में ही दम तोड़ देती है। कुछ दिनों बाद फड़ मालिक से ‘प्रसाद’ लेकर वही खेल, उसी जगह, उसी शान से फिर शुरू हो जाता है।
अब सवाल पुलिस से
क्या वाराणसी पुलिस इस जुए के नेटवर्क को अपराध मानेगी?
या फिर हर बार की तरह इसे भी “अवसर” समझकर नज़रअंदाज़ कर दिया जाएगा?
काशी की पहचान अब श्रद्धा से ज़्यादा सिस्टम की चुप्पी से बनने लगी है, और इस चुप्पी की कीमत आम नागरिक चुका रहा है।





