
- उमाशंकर सिंह
“यमपुत्र” एक सामाजिक और विचारोत्तेजक नाटक है, जो हिंदू समाज में अंतिम संस्कार करने वाले ब्राह्मणों, जिन्हें “कण्टाहा” या “महापात्र” के रूप में जाना जाता है, के जीवन, सम्मान और सामाजिक स्थिति पर गहरे सवाल उठाता है। यह नाटक न केवल मनोरंजन करता है, बल्कि समाज की उन गहरी जड़ों को उजागर करता है, जहां परंपराएं, सामाजिक भेदभाव और मानवीय संवेदनाएं आपस में टकराती हैं।
“यमपुत्र” नाटक का केंद्रीय विषय यमपुत्र, यानी अंतिम संस्कार करने वाले ब्राह्मणों की सामाजिक स्थिति और उनके प्रति समाज का व्यवहार है। हिंदू धर्म में मृत्यु और अंतिम संस्कार से जुड़े कर्मकांड अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं, क्योंकि इन्हें आत्मा की मुक्ति और स्वर्ग प्राप्ति का माध्यम माना जाता है। फिर भी, इन कर्मकांडों को संपन्न करने वाले यमपुत्र को समाज में वह सम्मान और स्थान नहीं मिलता, जिसके वे हकदार हैं। नाटक यह सवाल उठाता है कि क्या हम इन पंडितों को उनकी सेवा के लिए उचित सम्मान देते हैं? क्या हमारी परंपराएं और सामाजिक संरचना उनके साथ न्याय करती हैं?
यह नाटक समाज में व्याप्त पाखंड, वर्ग भेद, और परंपराओं के नाम पर होने वाले भेदभाव को उजागर करता है। यह दर्शकों को यह सोचने पर मजबूर करता है कि जो लोग मृत्यु के बाद आत्मा की शांति के लिए कार्य करते हैं, क्या उन्हें जीवित अवस्था में समाज से वह सम्मान और समानता मिलती है, जो अन्य ब्राह्मणों या वर्गों को प्राप्त होती है?
टीम रतनव रमा पांडेय के नेतृत्व में दिल्ली के प्रतिष्ठित श्री राम सेंटर में “यमपुत्र” का विशेष मंचन किया गया। इस मंचन में बेहतरीन कलाकारों की टीम ने सामाजिक, पारिवारिक, और परंपरागत मुद्दों को संवेदनशीलता और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। नाटक की प्रस्तुति में न केवल मनोरंजन का तत्व था, बल्कि यह दर्शकों को गहरी सोच में डालने में भी सफल रहा। रमा पांडेय और उनकी टीम ने कहानी, संवाद, और मंच सज्जा के माध्यम से यमपुत्र के जीवन की वास्तविकता को जीवंत कर दिखाया।
“यमपुत्र” नाटक समाज में उन अनदेखे और उपेक्षित लोगों की आवाज बनता है, जो हमारी परंपराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, फिर भी समाज के हाशिए पर हैं। यह नाटक न केवल यमपुत्रों की स्थिति पर प्रकाश डालता है, बल्कि सामाजिक समानता, सम्मान, और मानवता जैसे व्यापक मुद्दों पर भी चर्चा को प्रेरित करता है। यह दर्शकों को यह सोचने के लिए प्रेरित करता है कि क्या हमारी सामाजिक व्यवस्था और परंपराएं वास्तव में सभी के साथ न्याय करती हैं?
“यमपुत्र” एक ऐसा नाटक है जो मनोरंजन के साथ-साथ सामाजिक चेतना को जगाने का कार्य करता है। रतनव रमा पांडेय और उनकी टीम ने इस मंचन के माध्यम से एक ऐसी कहानी प्रस्तुत की, जो दर्शकों के दिल और दिमाग को छूती है। यह नाटक हमें यह सिखाता है कि समाज में हर व्यक्ति, चाहे वह किसी भी भूमिका में हो, सम्मान और समानता का हकदार है। यह नाटक न केवल एक कला प्रस्तुति है, बल्कि एक सामाजिक क्रांति का आह्वान भी है, जो हमें अपने मूल्यों और व्यवहारों पर पुनर्विचार करने के लिए प्रेरित करता है।





