
- रिपोर्ट: पंकज झा
वाराणसी। पूर्वोत्तर रेलवे के भटनी-औंड़िहार रेलखंड पर दोहरीकरण और विद्युतीकरण परियोजनाओं का काम पूरा होने के बाद आज रेल संरक्षा आयुक्त, उत्तर पूर्व सर्किल प्रणजीव सक्सेना ने इस खंड का भव्य संरक्षा निरीक्षण किया। निरीक्षण में पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी (निर्माण) अभय कुमार गुप्ता, मंडल रेल प्रबंधक (वाराणसी) आशीष जैन तथा रेल विकास निगम लिमिटेड के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। निरीक्षण की शुरुआत लाररोड स्टेशन से हुई, जहां संरक्षा आयुक्त ने इलेक्ट्रानिक इंटरलॉकिंग, सुरक्षा गेयर, वी डी यू स्टेशन पैनल, रिले रूम, यार्ड फाटक और प्लेटफार्म क्लियरेंस का परीक्षण किया। इसके बाद मोटर ट्राली से लाररोड-सलेमपुर रेलखंड का निरीक्षण करते हुए माइनर ब्रिज, रेलवे ओवर ब्रिज और समपार फाटकों की सुरक्षा जाँच की गई।
सलेमपुर और पिवकोल स्टेशनों पर भी दोहरीकरण एवं विद्युतीकरण के अनुरूप स्टेशन उपकरण, यार्ड रिमाडलिंग, वी डी यू पैनल और रिले रूम का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण का समापन ओएमएस स्पेशल ट्रेन द्वारा पिवकोल से लाररोड तक 127 किमी/घंटा की अधिकतम गति से स्पीड ट्रायल के साथ किया गया। विशेषज्ञों का कहना है कि यह परियोजना पूर्वी उत्तर प्रदेश के सबसे व्यस्त एकल-लाइन खंडों पर भीड़ कम करने और रेल सेवा की गति एवं आवृत्ति बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगी। इससे यात्री और माल ढुलाई दोनों सेवाओं में सुधार आएगा, यात्रा समय कम होगा और परिचालन दक्षता बढ़ेगी।
वर्तमान में कीड़िहरापुर-इन्दारा, सादात-औंड़िहार, भटनी-पिवकोल, बेलथरा रोड-कीड़िहरापुर, दुल्लहपुर-सादात, मऊ-दुल्लहपुर, पिवकोल-लाररोड सहित कुल 117 किमी का दोहरीकरण कार्य पूरा हो चुका है। शेष लाररोड-बेल्थरा रोड (13.85 किमी) खंड का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है, जिसमें घाघरा नदी पर तुर्तीपार रेल पुल और महत्वपूर्ण पुल संख्या 31 का निर्माण अंतिम चरण में है। पूरे परियोजना के पूरा होने पर गोरखपुर से वाराणसी तक रेलखंड दोहरीकृत होकर पूर्वी उत्तर प्रदेश में यातायात और आर्थिक विकास को मजबूती देगा।





