
पटना: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले कांग्रेस पार्टी में टिकट बंटवारे को लेकर गहरी नाराज़गी सामने आ रही है। पार्टी के कई वरिष्ठ और जमीनी नेता खुलकर चयन प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि न तो टिकट वितरण में पारदर्शिता बरती गई और न ही मेहनती कार्यकर्ताओं को उनका हक मिला।
एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने तीखा आरोप लगाते हुए कहा, “33 हजार वोट से हारने वाले को टिकट मिल सकता है, लेकिन जो केवल 113 वोट से हारा उसे अपात्र मान लिया गया। यह कैसा न्याय है?” उन्होंने आरोप लगाया कि वर्षों से पार्टी के लिए मेहनत करने वाले कार्यकर्ताओं की अनदेखी की गई है।
नेता ने यह भी बताया कि पार्टी के इकलौते यादव विधायक, जिन्होंने लगातार क्षेत्र में काम किया, उन्हें भी इस बार टिकट नहीं दिया गया। “उनकी जगह एक ऐसे व्यक्ति को टिकट दिया गया जो हाल ही में पार्टी में शामिल हुए हैं,” उन्होंने कहा।
टिकट चयन के मानकों पर उठे सवाल
पार्टी के शीर्ष नेतृत्व द्वारा बार-बार यह दावा किया गया कि टिकट वितरण तय मानदंडों के आधार पर किया जाएगा, लेकिन इन मानदंडों को कभी स्पष्ट नहीं किया गया। नेता ने कहा, “कहा गया कि कुछ पैरामीटर तय किए गए हैं, लेकिन वे क्या हैं, यह कोई नहीं जानता। टिकट पाने वालों की सूची साफ बताती है कि मेहनत करने वालों को नजरअंदाज किया गया है।”
उन्होंने कहा कि पहले यह आश्वासन दिया गया था कि जो नेता अपने क्षेत्र में कोई ठोस योजना पूरी करेगा, उसे टिकट में प्राथमिकता मिलेगी। “लेकिन जब हमने योजनाएं पूरी कर लीं, तब हमें किनारे कर दिया गया,” उन्होंने निराशा जताई।
‘दिल्ली से आए लोग ही करने लगे टिकट का फैसला’
नेता ने यह भी आरोप लगाया कि स्थानीय कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर दिल्ली से आए लोगों को टिकट वितरण की जिम्मेदारी दी गई। “जो लोग चार-पांच महीने पहले दिल्ली से आकर पार्टी में जुड़े, वही टिकट तय करने लगे। जिन लोगों ने राहुल गांधी की आलोचना की थी, उन्हें भी टिकट दिया गया,” उन्होंने कहा।
उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यही कांग्रेस का ‘नया सामाजिक न्याय’ है? “पार्टी हमेशा सामाजिक न्याय की बात करती है, लेकिन इस बार खुला अन्याय हुआ है। अब ये सब बातें छिपी नहीं हैं,” उन्होंने दो टूक कहा।
बढ़ता असंतोष, पार्टी के लिए नई चुनौती
कांग्रेस में टिकट बंटवारे को लेकर असंतोष पहले भी देखने को मिला है, लेकिन इस बार यह पहले से कहीं ज्यादा व्यापक और तीव्र है। कई जिलों में कार्यकर्ता खुलेआम विरोध कर रहे हैं। कुछ नेताओं ने निर्दलीय चुनाव लड़ने तक के संकेत दिए हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह असंतोष अगर यूं ही जारी रहा, तो इसका सीधा असर चुनावी परिणामों पर पड़ेगा। पहले से ही कमजोर स्थिति में खड़ी कांग्रेस के लिए यह एक बड़ी चुनौती बन सकता है।
अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस आलाकमान नाराज़गी दूर करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन जमीनी कार्यकर्ताओं का कहना है कि जब तक मेहनती नेताओं को सम्मान और पारदर्शिता नहीं मिलेगी, तब तक असंतोष खत्म नहीं होगा।



