
- रिपोर्ट- प्रतीक वार्ष्णेय
खंड शिक्षा अधिकारी की रंगीन दीवारों के साए में जर्जर स्कूल की छतें – क्या बच्चों की ज़िंदगी अब भी सस्ती है?”
झालावाड़ (राजस्थान) में स्कूल की इमारत ढहने से मासूम बच्चों की दर्दनाक मौत ने पूरे देश को झकझोर दिया है। शिक्षा व्यवस्था पर फिर से गहरे सवाल खड़े हो गए हैं – क्या हमारे बच्चों की सुरक्षा सिर्फ भाषणों तक सीमित है?
हाथरस का “जागेश्वर प्राथमिक विद्यालय” बना खतरे की घंटी!
उत्तर प्रदेश सरकार भले ही कागज़ों पर कई स्कूल भवनों को गिराकर नई इमारतों के दावे कर रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। हाथरस नगर के जागेश्वर प्राथमिक विद्यालय की हालत इतनी जर्जर है कि किसी भी दिन बड़ा हादसा हो सकता है।
जर्जर दीवारें, टपकता प्लास्टर, छत में गहरी दरारें, और स्कूल के आगे भरा हुआ गंदा पानी – बच्चों की जान हर दिन खतरे में डाल रहे हैं ये हालात।
चौंकाने वाली बात ये है कि इसी जर्जर स्कूल परिसर में बना है खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) का ऑफिस – जो कि पूरी तरह सुसज्जित, रंग-बिरंगा और सुरक्षित है!
तो क्या सिर्फ अफसरों की जान कीमती है? बच्चों की नहीं?
क्या सरकार और प्रशासन किसी और दर्दनाक हादसे का इंतज़ार कर रहे हैं? राजस्थान जैसी त्रासदी अगर उत्तर प्रदेश में दोहराई गई तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी?
सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले मासूम बच्चों को आखिर कब मिलेगा एक सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल ।





